'अब वे खुद के बेटे के बारे में भला कैसे सोच सकते हैं?' (लीड-1)
होशियारपुर (पंजाब), 11 अप्रैल (आईएएनएस)। "किसी के बेटे को छीनने के बाद भला वे खुद के बच्चे के बारे में कैसे सोच सकते हैं?" ये शब्द हैं उस मां के, जिसके 16 वर्षीय बेटे अभि वर्मा का अपहरण कर उसकी हत्या कर दी गई थी। लेकिन इस अपराध को अंजाम देने वाले दंपति ने खुद के बेटे के लिए अब अदालत से अपने वैवाहिक अधिकार की मांग की है। दोनों पति-पत्नी जेल में हैं। पति जसबीर सिंह मौत की सजा का सामना कर रहा है तो पत्नी सोनिया आजीवन कारावास की सजा का।
दोनों ने अपने साथी विक्रम वालिया के साथ मिल कर वर्ष 2005 में होशियारपुर कस्बे में अभि वर्मा का अपहरण कर उसकी हत्या कर दी थी।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने अभि वर्मा की जघन्य हत्या के आरोप में दिसंबर 2006 में जसबीर, सोनिया और उसके सहयोगी विक्रम वालिया को मौत की सजा सुनाई थी।
जसबीर और विक्रम की मौत की सजा तो उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय ने बरकरार रखा, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने सोनिया की सजा को घटा कर आजीवन कारावास में बदल दिया। सोनिया उस बच्चे को ट्यूशन पढ़ाती थी।
जिस समय जसबीर और सोनिया ने इस अपराध को अंजाम दिया था, उस समय उनकी शादी को मात्र आठ महीने ही हुए थे। लिहाजा दोनों ने अपने वैवाहिक अधिकार के लिए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में गुहार लगाई है।
अभि की मां अनिता का कहना है, "यह शर्मनाक और चकित करने वाला है। किसी के बेटे को छीनने के बाद दोनों भला बच्चा पैदा करने के बारे में कैसे सोच सकते हैं?"
अभि के पिता और स्थानीय व्यापारी रवि वर्मा ने आईएएनएस को बताया, "हमें पता चला है कि दोषियों ने अपने पिता के जरिए उच्च न्यायालय में अपने वैवाहिक अधिकार के लिए एक याचिका दायर की है। इसके जरिए दोनों एक बच्चे को जन्म देना चाहते हैं। हम इसके खिलाफ अंतिम सांस तक लड़ेंगे।"
जसबीर सिंह के पिता जरनैल सिंह ने चंडीगढ़ स्थित उच्च न्यायालय में अप्रैल के प्रथम सप्ताह में अपने बेटे-बहू के वैवाहिक अधिकार के लिए एक याचिका दायर की है। दोनों पटियाला केंद्रीय कारागार में कैद हैं।
याचिका में कहा गया है कि दोनों को वैवाहिक अधिकार दिए जाने से परिवार को एक वारिस मिल जाएगा, क्योंकि जरनैल सिंह के पास जसबीर के अलावा दूसरा कोई बेटा नहीं है।
अभि के पिता का कहना है, "अभि भी हमारा इकलौता बेटा था। लेकिन उसे उन दोनों ने मार डाला। अब वे अपने वंश वृक्ष को जारी रखना चाहते हैं। वे दया के बिल्कुल हकदार नहीं हैं।"
ज्ञात हो कि अभि का स्कूल जाते समय रास्ते में अपहरण कर लिया गया था। अपहर्ताओं ने रिहाई के बदले 50 लाख रुपये की फिरौती मांगी थी। फिरौती के लिए मोल-तोल जारी था, तब तक अभि का नग्न शव आदमपुर कस्बे के पास पड़ा पाया गया।
दरअसल, बेहोशी की दवा की अधिक खुराक देने के कारण अभि की पहले ही मौत हो चुकी थी। लेकिन अपहर्ताओं ने फिरौती का नाटक तब तक जारी रखा, जब तक कि पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार नहीं कर लिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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