नक्सलियों से मुकाबले के लिए पुलिस के पास लाठी
रायपुर, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। पिछले दिनों नक्सलियों द्वारा 76 अर्धसैनिक बलों की हत्या के कारण छत्तीसगढ़ का बस्तर क्षेत्र इन दिनों सुर्खियों में है लेकिन एक हकीकत यह भी है कि नक्सलियों से मोर्चा लेने के लिए यहां सैकड़ों पुलिसवालों के पास हथियारों के नाम पर सिर्फ लाठी है।
एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि इस युद्ध को 'लाठी बनाम मोर्टार' के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। जंगलों में मौजूद कई पुलिस थानों में नक्सली हमले का खतरा है लेकिन यहां तैनात पुलिसवालों के हाथों में हथियारों के नाम पर लाठी या अन्य अप्रचलित हथियार हैं।
राज्य के नक्सली क्षेत्र में 15 साल से तैनात एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने आईएएनएस ने कहा, "केंद्र सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार नक्सलवादियों का सफाया करना चाहती है लेकिन इसके लिए रणनीति और दूरदृष्टि की कमी है। घने जंगलों में सैकड़ों पुलिसवालों को नक्सलियों की दया पर छोड़ दिया गया है।"
उन्होंने कहा, "देश को जानना चाहिए कि जंगलों में रहने वाले पुलिस के कांस्टेबल रैंक के कर्मचारी नक्सलियों को रोजाना सलाम करते हैं ताकि उनकी जिंदगी सुरक्षित रहे। दूसरी तरफ नई दिल्ली और रायपुर में बैठे नेता और मंत्री दावा करते हैं कि नक्सलियों के चंद दिन बचे हैं।"
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने हाल ही में छत्तीसगढ़ सरकार पर एक रिपोर्ट जारी की है जिसके अनुसार, राज्य में पुलिस विभाग के पास कुल 49,143 हथियार हैं जिनमें 11,232 (23 फीसदी) अप्रचलित हैं। इन हथियारों में प्वाइंट 303 रायफलें, प्वाइंट 410 बंदूकें, प्वाइंट 38 रिवाल्वर्स, प्वाइंट 303 लाइट मशीन गंस (एलएमजी) और ग्रेनेड फायरिंग (जीएफ) रायफल्स शामिल हैं। अप्रचलित होने के बावजूद इनका इस्तेमाल किया जा रहा है।
रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि छत्तीसगढ़ पुलिस के पास जरूरत के हिसाब से 20 फीसदी हथियार कम हैं।
पुलिस मुख्यालय के हिसाब से 47,265 हथियारों की जरूरत है जबकि उपलब्धता केवल 37,911 हथियारों की ही है यानी 9,354 हथियार कम हैं।
एक अधिकारी ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या यह है कि नक्सलप्रभावित इलाकों में तैनात इन पुलिसवालों को लगता है कि सजा के तौर पर उन्हें बारूदी सुरंग से भरे इलाके में भेज दिया गया है और वह नक्सलियों के दोस्त बनकर ही जिंदा रह सकते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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