पहले ही पता चल सकेगी आत्महत्या की प्रवृत्ति
अवसाद को दूर करने के लिए दी जाने वालीं दवाएं अवसाद को दूर करने में तो मदद करती हैं लेकिन इनका व्यक्ति की मन:स्थिति पर बुरा प्रभाव भी पड़ता है और उनमें आत्महत्या के विचार भी आ सकते हैं।
अब तक इसका पता लगाने के लिए कोई चिकित्सकीय जांच विकसित नहीं हुई है और केवल समय गुजरने के साथ मनोवैज्ञानिक ही मरीज की स्थिति बेहतर या बदतर होने के विषय में जान सकता है।
अब 'यूनीवर्सिटी ऑफ कैलीफोर्निया, लास एंजेलिस' (यूसीएलए) के शोधकर्ताओं ने एक प्रकार की पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित की है। इसमें एक बायोमार्कर के जरिए मरीज में आत्हत्या की प्रवृत्ति जांची जा सकती है।
शोधकर्ता एमी हंटर और उनके साथियों के मुताबिक शोध के दौरान उन्होंने अवसाद का इलाज करवा रहे मरीजों के मस्तिष्क की गतिविधियों का इलेक्ट्रोइंसिफेलोग्राफ से अध्ययन किया था। शोधकर्ताओं ने पाया इलाज के लिए दवाएं शुरू करने के 48 घंटे के अंदर ही उनके मस्तिष्क में आत्महत्या की प्रवृत्ति के लक्षण दिखने लगे थे।
हंटर ने कहा कि पूर्व के शोधों से स्पष्ट हुआ है कि अवसाद दूर करने के लिए दी जाने वाली समान्य दवाओं से आठ से 14 प्रतिशत मरीजों में आत्महत्या की प्रवृत्ति उत्पन्न होती है।
इस अध्ययन में पहली बार अवसाद के लिए दवाएं लेने के दौरान आत्महत्या की प्रवृत्ति और मस्तिष्क में होने वाले विशेष बदलावों के बीच संबंध बताया गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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