नक्सली गतिविधियों की खबर रखने में खुफिया तंत्र नाकाम : भाजपा

भाजपा के केंद्रीय पदाधिकारियों की गुरुवार को हुई एक बैठक में नक्सली हिंसा पर पारित किए गए प्रस्ताव में कहा गया, "वर्तमान में, नक्सली गतिविधियों के बारे में सरकारी प्रतिष्ठान का सतर्कता-तंत्र नाम मात्र का है। इस सतर्कता-तंत्र को मजबूत किए जाने की आवश्यकता है। अर्धसैनिक बलों को एक समयबद्घ कार्यक्रम के तहत सुदृढ़ करना, उनका आधुनिकीकरण करना तथा उन्हें यथेष्ठ फायर पावर से सुसज्जित करना तत्काल लाज़मी है।"

छत्तीसगढ़ में मंगलवार को नक्सलियों द्वारा सुरक्षाबलों पर किए गए हमले को बर्बर, अमानवीय और राष्ट्र विरोधी करार देते हुए पार्टी ने इसकी घोर निंदा की। प्रस्ताव में कहा गया कि यह हमला राष्ट्र को इस कठोर सच्चाई की याद दिलाने वाला है कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) शासन के विगत 6 वर्षो में नक्सलियों के भौगोलिक विस्तार में और उनकी शक्ति की तीव्रता में कई गुना वद्घि हुई है।

प्रस्ताव में कहा गया कि 2004-09 की अवधि के दौरान नक्सलियों की संख्या में कई गुना वृद्घि हो गई, तो भी केन्द्रीय सरकार मूक-दर्शक बनी रही। झारखण्ड, छत्तीसगढ़ और आन्ध्र प्रदेश में कांग्रेस पार्टी का चुनावों के समय माओवादियों से मेलजोल रहता था। छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार द्वारा की गई पहल का केन्द्र ने विरोध किया था। संप्रग के कुछ वर्गो ने कुछ राज्यों में नक्सलियों के पक्ष में प्रचार भी किया था। पश्चिम बंगाल इसका जीता-जागता उदाहरण है।

पार्टी ने सभी राजनीतिक दलों और सभी तरह का मत रखने वाले लोगों का आह्वान किया कि वे नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए मिलकर लड़ाई लड़ें। भाजपा भारत सरकार और सभी राज्य सरकारों का भी आह्वान करती है कि वे नक्सलियों के विरूद्घ एकीकृत रणनीति तैयार करें।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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