भारतीय कंपनी से सौदे पर नेपाली प्रधानमंत्री को सम्मन
सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार से विवाद के सुलझने तक सरकार से सौदे को रोकने को कहा और प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल से सोमवार को न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने को कहा।
न्यायाधीश सुशील कर्की ने विदेश मंत्री और उप प्रधानमंत्री सुजाता कोइराला को भी सम्मन जारी किया।
एक वकील हेम मणि सुबेदी और कानून के छात्र नर बहादुर केसी ने मंगलवार को नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय में अलग-अलग जनहित याचिकाएं दायर करके नेपाली पासपोर्ट की छपाई के लिए गठबंधन सरकार और भारत की सरकारी कंपनी सिक्युरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कारपोरेशन के बीच हुए सौदे को रद्द करने को कहा था। उनकी याचिकाओं पर न्यायालय ने यह आदेश जारी किया है।
पासपोर्ट विवाद का असर संसद में भी देखा गया और सांसदों के बीच मतभेद पैदा हो गया है।
भारतीय कंपनी के साथ सौदा नहीं करने की सलाह देने वाली संसद की लोक लेखा समिति के सदस्यों ने गुरुवार को बैठक की और सरकार के खिलाफ कार्रवाई पर विचार किया।
समस्या तब शुरू हुई जब विदेश मंत्रालय ने वर्ष 2004 में आरंभ एक निविदा प्रक्रिया को रद्द कर दिया।
अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन द्वारा तय नियमों के अनुसार नेपाल ने हस्तलिखित पासपोर्ट के स्थान पर मशीन से पढ़े जा सकने वाले 30 लाख पासपोर्ट बनाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय निविदा जारी की थी।
अंतिम चयन के लिए चार कंपनियों का चयन किया गया था लेकिन राजनीतिक संकट के कारण इस प्रक्रिया में विलंब हुआ।
इस वर्ष जनवरी में विदेश मंत्री सुजाता कोइराला ने सरकार पर निविदा प्रक्रिया को समाप्त करने का दबाव डाला। उन्होंने कहा कि इससे नेपाल अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन द्वारा तय समय सीमा का पालन करने में विफल हो जाएगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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