लौह पदार्थो के सेवन में 50 के बाद कमी लाएं
वाशिंगटन, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। अगर 50 की उम्र के बाद उन खाद्य पदार्थो के सेवन में कमी न की जाए जिनमें उच्च मात्रा में तांबा और लौह पाया जाता है तो इससे बढ़ती उम्र के साथ होने वाली अल्जाइमर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
वैज्ञानिकों ने तांबा व लौह के उच्च स्तर और अल्जाइमर, हृदय संबंधी रोगों व अन्य उम्र-जनित बीमारियों के बीच संबंधों का पता लगाया है। साथ ही यह भी सुझाव दिया है कि 50 की उम्र के बाद ध्यान रखना चाहिए कि शरीर में ऐसे हानिकारक धातु पदार्थो का स्तर न बढ़े।
इस रिपोर्ट के लेखक जॉर्ज जे. ब्रेवर कहते हैं कि शरीर में मौजूद तांबा और लौह की विषाक्तता के बारे में आम लोग पूरी तरह अनजान हैं।
अध्ययन में यह भी बताया गया है कि युवावस्था में प्रजनन संबंधी स्वास्थ्य के लिए तांबा और लौह पदार्थ जरूरी होते हैं लेकिन 50 वर्ष की उम्र के बाद इनका उच्च स्तर कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त करने लगता है जिससे उम्र-जनित बीमारियों के बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है।
अमेरिकन केमिकल सोसाइटी (एसीएस) की एक रिलीज में ब्रेवर ने कहा, "आबादी के एक बड़े हिस्से को तांबे और लौह पदार्थो के मुक्त सेवन से विषाक्तता का खतरा है। इससे बचाव से लिए अभी से प्रयास शुरू कर देने चाहिए।"
अध्ययन में कहा गया है कि 50 की उम्र के बाद तांबा व लौह की मात्रा वाली विटामिन और खनिज वाली गोलियों का सेवन बंद कर देना चाहिए। मांस कम खाना चाहिए और लौह का स्तर कम करने के लिए नियमित रूप से रक्तदान करना चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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