'ग्रीन हंट' का परिणाम है छत्तीसगढ़ हमला : नक्सली
ज्ञात हो कि नक्सलियों ने मंगलवार को बस्तर क्षेत्र के दंतेवाड़ा जिले में केद्रीय रिजर्व पुलिस बल (केरिपु) के दल पर हमला कर 75 जवानों को मौत के घाट उतार दिया।
बिहार-झारखण्ड-उत्तरी छत्तीसगढ़ के एरिया कमांडर गोपाल ने बीबीसी की हिंदी सेवा के साथ एक बातचीत में कहा, "छत्तीसगढ़ हमला और इसके पहले उड़ीसा में किया गया हमला केंद्र सरकार के ऑपरेशन ग्रीन हंट का प्रत्यक्ष परिणाम है।"
गोपाल ने कहा, "हमारे कैडरों पर ऑपरेशन ग्रीन हंट का कोई असर नहीं है। हम उसके बाद से और सतर्क हुए हैं। हम मानते हैं कि केंद्र सरकार के साथ सीधी मुठभेड़ का समय अब आ गया है। हमारे कैडरों में क्रांति की एक नई भावना जाग्रत हो उठी है।"
गोपाल ने कहा, "हम अर्धसैनिक बटालियनों से घिर गए हैं। वे जंगलों में आग लगा रहे हैं और जनजातियों को पलायन के लिए मजबूर कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में हमारे पास हमला करने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है।"
गोपाल ने कहा, "हम सरकार के साथ बातचीत को तैयार थे। चिदंबरम साहब 72 घंटे का संघर्ष विराम चाहते थे लेकिन हमारे नेता किशनजी ने 72 दिनों के संघर्ष विराम का प्रस्ताव दिया। लेकिन हम आपरेशन ग्रीन हंट को समाप्त कराना चाहते थे और बातचीत का उचित वातावरण तैयार करने के लिए विभिन्न जेलों में कैद अपने नेताओं की रिहाई चाहते थे। लेकिन चिदंबरम ने इंकार कर दिया।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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