अदालत और वार्ता से नहीं होगा राम मंदिर का निर्माण : विहिप (लीड-2)
राम मंदिर आंदोलन का नेतृत्व करने वाली विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के केन्द्रीय मार्ग दर्शक मंडल की बैठक में एकत्रित हुए देशभर के साधु-संतों ने सोमवार को गंगा और गो रक्षा के साथ-साथ राम मंदिर निर्माण के मसले पर आगामी रणनीति को लेकर रायशुमारी की और तीनों विषयों पर प्रस्ताव पारित किए।
बैठक में हुई चर्चा की जानकारी देते हुए हिन्दू धर्माचार्य सभा के अध्यक्ष दयानंद सरस्वती, ज्योतिषपीठ के स्वामी वासुदेवानंद, महानिर्वाणी अखाड़ा के स्वामी विश्वदेवानंद और संन्यासी अखाड़े के स्वामी विश्वेश्वरानंद ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि 'गाय, गंगा राम' हमारी सांस्कृतिक अस्मिता का सवाल है। हमने इसे कभी भी संपत्ति का विषय नहीं माना। इन मुद्दों पर संत समाज एक साथ है। केन्द्र की विभिन्न सरकारों ने इन तीनों मुद्दों पर हिन्दुओं की आस्था के साथ छलावा किया है और राजनीति की है।
बैठक में साधु-संतों ने 16 अगस्त से 15 नवम्बर तक जन जागरण करने का फैसला किया। इस दौरान देश के हर मंदिर को 'हनुमत शक्ति जागरण' का केन्द्र बनाया जाएगा और हनुमान चालीसा का पाठ किया जाएगा।
विहिप के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल ने कहा, "मंदिर का निर्माण न्यायालय के फैसले से नहीं होगा। न्यायालय का निर्णय देश में एक भयंकर संघर्ष को जन्म देगा। इसके लिए जन जागरण का कार्यक्रम किया जाएगा।"
स्वामी विश्वदेवानंद ने कहा, "राम मंदिर के निर्माण को लेकर अब किसी से वार्ता की आवश्यकता नहीं है। हम इसे जरूरी नहीं मानते।"
विहिप के इन धर्माचार्यो ने यह भी स्पष्ट किया कि राम मंदिर मसले को वोट बैंक के लिए किसी भी राजनीतिक दल को इस्तेमाल करने नहीं दिया जाएगा।
स्वामी वासुदेवानंद ने एक सवाल के जवाब में कहा, "पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग सरकार) की कुछ मजबूरियां रही होंगी या फिर उनकी कमजोरियां रहीं होंगी इसलिए इस दौरान राम मंदिर का निर्माण नहीं हो सका। जिस प्रकार से पहले हुआ, उसे दोहराया नहीं जाएगा।"
उन्होंने कहा कि, "सोमनाथ की तर्ज पर राम मंदिर का निर्माण संसद में कानून के जरिए ही संभव है। इसलिए राजनीतिक दल राजनीति से ऊपर उठकर इसका समर्थन करें। अदालत और वार्ता से इसका फैसला नहीं होगा।"
उल्लेखनीय है कि राम मंदिर आंदोलन को अपने हाथ में लेकर ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शिखर तक का सफर तय किया था।
साधु-संतों ने राम मंदिर निर्माण को लेकर जहां प्रतिबद्धता दिखी वहीं इसके प्रारूप को लेकर उनमें एकमत का अभाव भी दिखा।
मार्गदर्शक मंडल की बैठक में श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष स्वामी नृत्यगोपालदास ने कहा, "इसका समाधान मुस्लिम समुदाय से बातचीत के जरिए निकाला जाना चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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