'जरदारी ने मुर्तजा को रिश्वत की पेशकश की थी'

नई दिल्ली, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने अपनी पत्नी बेनजीर भुट्टो के प्रधानमंत्रित्व काल के दौरान अपने साले मुर्तजा भुट्टो के साथ मध्य पूर्व में सौदेबाजी करने की कोशिश की थी, जिसे उसने पूरी तरह नामंजूर कर दिया था। इस बात का जिक्र मुर्तजा की पुत्री फातिमा भुट्टो ने अपनी पुस्तक 'सांग्स ऑफ ब्लड एंड स्वोर्ड' में किया है।

जरदारी पर मुर्तजा की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया गया था लेकिन उन्हें इस आरोप से बरी कर दिया गया था।

फातिमा लिखती हैं, "यह बेनजीर के पहले कार्यकाल में सीरिया की राजकीय यात्रा के दौरान हुआ , हम लोग उन दिनों हम वहां निर्वासित जीवन बिता रहे थे। जरदारी मध्यपूर्व में एक सौदा करने के लिए इस हद तक चले गए थे कि उन्होंने पापा से इसमें सहायता की एवज में मुनाफे में से हिस्सा देने की पेशकश तक कर डाली थी।"

फातिमा का कहना है, "पापा आजिज आ चुके थे, उन्हें उनकी बहन के पति कभी पसंद नही थे। उनके भ्रष्टाचार और ज्यादतियों के किस्से अक्सर पापा के कानों तक पहुंचते रहते थे। यह बात उन्हें परेशान करती थी कि यह शख्स दुनिया भर के निवेशकों के साथ धोखाधड़ी करने के लिए जुल्फिकार (पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री एवं फातिमा के दादा)के नाम और यादों इस्तेमाल करेगा। उन्होंने जरदारी को और भी नाराज कर दिया.."

वह आगे लिखती हैं, "पापा ने गुस्से से भरकर कहा, हम ऐसा नहीं करेंगे जरदारी।"

मुर्तजा 20 सितम्बर 1996 को कराची में अपने आवास के समीप पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारे गए थे। उस समय फातिमा की उम्र 14 साल थी। तीन दिसंबर 2009 को कराची की एक अदालत ने 20 पुलिसकर्मियों को कत्ल के आरोप से बरी कर दिया था।

वर्ष 1996 में बेनजीर सरकार की बर्खास्तगी के बाद मुर्तजा की हत्या में हाथ होने के आरोप में जरदारी को बंदी बना लिया गया था। इस मामले में कभी कोई आरोप साबित नहीं किया जा सका क्योंकि मुर्तजा के कत्ल वाले स्थान को पुलिस जांचकर्ताओं के मौके पर पहुंचने से पहले ही धुलवा दिया गया था।

फातिमा लिखती हैं कि जब जरदारी को बरी किया गया तब वे क्यूबा में थीं। हत्याओं के आरोप में जब जरदारी को बंदी बनाया गया था उस दौरान भी वह ज्यादा दिन सलाखों के पीछे नहीं रहे थे बल्कि वह कराची में अपने एक मित्र के सुविधासंपन्न अस्पताल में भर्ती रहे। वह लिखती हैं कि उसके बाद उन्होंने चमत्कारिक ढंग से हृदय रोग से छुटकारा पा लिया और उनके उस डॉक्टर मित्र को तेल एवं प्राकृतिक गैस मंत्री बना दिया गया।

उन्होंने जरदारी के प्रति अपने पिता की नफरत का एक और उदाहरण दिया है। वह लिखती हैं, "पापा साक्षात्कार या भाषण देते समय अक्सर जरदारी को चोर कहकर पुकारा करते थे। उन्होंने 'आसिफ बाबा और 40 चोर' कहना शुरू कर दिया था। उनका यह जुमला बहुत हिट रहा था मुझे लिखते हुए गर्व हो रहा है कि यह आज भी एक लोकप्रिय मुहावरा है।"

भुट्टो परिवार पिछले चार दशक से हिंसा का शिकार होता आया है। फातिमा के दादा और पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भट्टो को फांसी दे दी गई थी। फातिमा के चाचा शाहनवाज 18 जुलाई 1985 को फ्रांस के नीस में एक होटल में रहस्यमय हालात में मृत मिले थे। भुट्टो परिवार को यकीन है कि उन्हें जहर देकर मारा गया था।

फातिमा के पिता मुर्तजा 20 सितम्बर 1996 को पुलिस मुठभेड़ में मारे गए थे और उनकी बुआ तथा पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की 27 दिसंबर 2007 को हत्या हो गई थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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