प्रतिरोधकता परिवर्तित कर सकता है बुढ़ापे का जीन
लंदन, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। वैज्ञानिकों का कहना है कि इंसान और कई जीवों में पाए वाले जीन डीएएफ-16 के अध्ययन से मानव में बुढ़ापे, प्रतिरोधकता और प्रतिरक्षा को समझने में मदद मिल सकती है।
प्रयोगशाला कृमि सी. एलीगेंस और इसके विकासपरक जीवों में डीएएफ-16 बुढ़ापे और औसत जीवन काल को नियंत्रित करता है।
बर्मिघम विश्वविद्यालय के शोधकर्ता रॉबिन मे कहते हैं, "बुढ़ापा वह प्रक्रिया है जिससे प्रत्येक जीव को गुजरना पड़ता है लेकिन सभी जीवों में इसकी दर अलग-अलग होती है। हम जानते हैं कि नजदीकी संबंध रखने वाली जातियों का भी औसत जीवन काल एक-दूसरे से बहुत अलग होता है।"
रॉबिन ने कहा, "हम यह जानना चाहते थे कि जीन सामान्य बुढ़ापे को किस तरह नियंत्रित करते हैं और इनका अन्य गुणों जैसे प्रतिरोधकता पर क्या प्रभाव होता है।"
उन्होंने बताया कि अध्ययन के लिए वह जीन चुना गया जिसके बारे में वह पहले से जानते थे। उन्होंने अध्ययन किया कि डीएएफ-16 जीन विभिन्न जातियों में बुढ़ापे की विभिन्न दरों को किस तरह नियंत्रित करता है।
रॉबिन और उनके सह अध्ययनकर्ताओं ने कृमि की चार संबंधित जातियों में लंबे जीवन, तनाव, प्रतिरक्षा और प्रतिरोधकता की तुलना की। उन्होंने इस चारों जातियों में डीएएफ-16 की सक्रियता में अंतर का भी अध्ययन किया और उन्होंने इस संदर्भ में चारों कृमियों में फर्क देखा।
रॉबिन के मुताबिक डीएएफ-16 जीनों का एक समूह है जो बुढ़ापे की प्रक्रिया और प्रतिरोधकता व भौतिक या पर्यावरणीय तनाव के लिए प्रतिक्रिया देता है।
अब बर्मिघम में शोध में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि जीन समूह डीएएफ-16 प्रतिरोधक तंत्र की जरूरतों को किस तरह से पूरा करता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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