बिना भेदभाव के सभी को शिक्षा मिलेगी: प्रधानमंत्री (लीड-3)
प्रधानमंत्री ने कहा, "करीब 100 साल पहले देश के महान सपूत गोपालकृष्ण गोखले ने ब्रिटिश कालीन विधानसभा में शिक्षा के अधिकार की बात कही थी। करीब 90 साल बाद भारत के संविधान में संशोधन कर शिक्षा के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाया गया। "
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि बिना किसी भेदभाव के सभी बच्चों की शिक्षा तक पहुंच हो। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे शिक्षा के जरिए देश को मजबूत बनाएं।
प्रधानमंत्री ने कहा, "आज सरकार सभी बच्चों को शिक्षा का अधिकार सौंप रही है। संसद में अगस्त 2009 को पारित बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा कानून आज से लागू हो गया है। "
प्रधानमंत्री ने कहा कि नौजवान हमारे देश का भविष्य हैं और उन्हीं पर खुशहाल और मजबूत भारत निर्भर है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस कानून को लागू कर अपने वादे को पूरा किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कानून यह दिखाता है कि हम बच्चों के भविष्य को कितनी अहमियत देते हैं।
शिक्षा का अधिकार कानून के गुरुवार से लागू होने के अवसर पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि बिना किसी लैंगिक और सामाजिक भेदभाव के सभी बच्चों की शिक्षा तक पहुंच हो। हमारी सरकार, राज्य सरकारों की भागीदारी के साथ यह सुनिश्चित करेगी कि शिक्षा के अधिकार कानून को लागू करने में धन की कमी आड़े न आए।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "मैं चाहता हूं कि हर भारतीय बच्चा, लड़की और लड़का, शिक्षा की रोशनी से रोशन हो। मैं चाहता हूं कि हर भारतीय एक बेहतर भविष्य का सपना देखे और उस सपने को पूरा करने के लिए काम करे।"
प्रधानमंत्री ने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए कहा कि उन्हें लंबी दूरी तय करके विद्यालय जाना पड़ता था। उन्होंने कहा, "मैं किरोसीन के लैम्प की मंद रोशनी के नीचे पढ़ता था। मैं आज जो कुछ भी हूं, वह शिक्षा की वजह से हूं।" प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अपील की कि वे शिक्षा के जरिए देश को मजबूत बनाएं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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