ज़रदारी पर लटकी तलवार

पाकिस्तान में भ्रष्ट्राचार निरोधक एजेंसी जल्द ही स्विट्ज़रलैंड से कहेगी कि वो राष्ट्रपति ज़रदारी के ख़िलाफ़ भ्रष्ट्राचार के मामले दोबारा खोले.
अगर स्विट्ज़रलैंड पाकिस्तान के इस आग्रह को मान लेता है तो राष्ट्रपति रहते हुए ही ज़रदारी के ख़िलाफ़ जाँच चल सकती है.
दरअसल पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर भ्रष्ट्राचार निरोधक एजेंसी के प्रमुख नावेद अहसान देश में भ्रष्ट्राचार के सैकड़ों मामलों को दोबारा नहीं खोलेंगे तो उन्हें जेल भेज दिया जाएगा. एजेंसी ने अपना क़दम कोर्ट के इसी बयान के बाद उठाया है.
कोर्ट ने कहा था कि अगर नेशनल एकाउंटिबिलीटी ब्यूरो के प्रमुख नावेद अहसान अगले 24 घंटों में अदालत की बात नहीं मानेंगे तो इसे अदालत की अवमानना समझा जाएगा.
आतंकवादी निरोधक एजेंसी के वकील आबिद ज़ुबैरी ने बताया," कोर्ट के निर्देश के बाद एजेंसी ने अपनी प्रक्रिया शुरु कर दी है."
माफ़ी का फ़रमान
वर्ष 2007 में कई पाकिस्तानी राजनेताओं और अधिकारियों को मिली आम माफ़ी के चलते इन लोगों के ख़िलाफ़ आरोप अमान्य हो गए थे लेकिन कोर्ट ने इस फ़ैसले को अवैध करार दिया था.कोर्ट का कहना है कि इन लोगों के ख़िलाफ़ मुकदमे दोबारा शुरु हों.
इसमें राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी समेत कई लोग शामिल है. राष्ट्रपति बनने से पहले ज़रदारी कई सालों तक जेल में थे और उन पर भ्रष्ट्राचार के कई आरोप लगे थे. हालांकि ज़रदारी का कहना है कि ये आरोप राजनीति से प्रेरित थे.
पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशरर्फ़ ने अपने कार्यकाल के दौरान कई नेताओं और अधिकारियों को आम माफ़ी दी थी. 90 के दशक के दौरान इन लोगों पर कई तरह के आरोप लगे थे.
इसी माफ़ीनामे को बेनज़ीर भुट्टो और परवेज़ मुशर्रफ़ के बीच सत्ता को लेकर हुए समझौते का आधार माना जाता है. बेनज़ीर भुट्टो की दिसंबर 2007 में हत्या कर दी गई थी.
नेताओं और अधिकारियों को माफ़ी देने के फ़ैसले को कोर्ट ने अवैध करार दिया है.
ये बात 2009 में ही सामने आई थी कि आठ हज़ार से ज़्यादा राजनेताओं और अधिकारियों को माफ़ीनामे से फ़ायदा हुआ है.
इस बीच ख़बर है कि पाकिस्तान पुलिस की सबसे बड़ी जाँच एजेंसी के निदेशक अहमद रियाज़ शेख को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हिरासत में ले लिया गया है.












Click it and Unblock the Notifications