पाकिस्तान में पटरी पर लौट सकता है बौद्ध पर्यटन
थाईलैंड के बौद्ध भिक्षुओं के नेतृत्व में 'वर्ल्ड फैलोशिप ऑफ बुद्धिस्ट्स' (डब्ल्यूएफबी) इन दिनों इस स्थल के प्रचार-प्रसार के लिए पाकिस्तान में है। इसका मुख्य आकर्षण कुषाण वंश के शासनकाल का तक्षशिला विश्वविद्यालय है। वर्ष 1980 में इसे यूनेस्को का विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी के मुताबिक डब्ल्यूएफबी प्रतिनिधिमंडल द्वारा इस्लामाबाद से 32 किलोमीटर दूर इस प्रसिद्ध पुरातात्विक स्थल के भ्रमण के बाद डब्ल्यूएफबी के महासचिव फैलॉप थाईएरी ने कहा, "पाकिस्तान दुनिया में एक महान बौद्ध तीर्थस्थल हो सकता है।"
राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध संगठन को गांधार विरासत को संरक्षित व विकसित करने और देश में परस्पर सद्भाव व पर्यटन को बढ़ावा देने को सहमति दे दी है।
गांधार साम्राज्य छठी शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर 11वीं ईसवी तक रहा। पहली से पांचवी ईसवी तक बौद्ध कुषाण राजाओं के समय में खूब फला-फूला।
तक्षशिला के अलावा मनशेरा, स्वाबी, मर्दान, स्वात, पेशावर और खैबर में भी बौद्ध धार्मिक स्थल हैं। इनमें राजा अशोक के शासन काल (304 ईसा पूर्व-232 ईसा पूर्व) के समय बने ऐतिहासिक स्थल भी शामिल हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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