बैलगाड़ी से स्कूल जाते हैं विद्यार्थी

वृंदावन, 25 मार्च (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के एक स्कूल ने पर्यावरण रक्षा के लिए अनूठी पहल की है। विद्यार्थियों को स्कूल लाने के लिए बैलगाड़ी का सहारा लिया जा रहा है, ताकि प्रदूषण को रोका जा सके।

मथुरा जिले से 25 किलोमीटर दूर वृंदावन स्थित संदीपनी मुनि स्कूल ने पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने के लिए विद्यार्थियों को लाने ले जाने के लिए बैलगाड़ियां चला रखी हैं।

स्कूल के प्रधानाचार्य राजेंद्र सिंह ने आईएएनएस से कहा कि भले ही हमारा प्रयास बहुत छोटा हो लेकिन बूंद-बूंद से ही सागर भरता है। अगर हमारी तरह अन्य स्कूल भी बसों के स्थान पर बैलगाड़ियों का इस्तेमाल करें तो बड़ा परिवर्तन हो सकता है।

उन्होंने कहा कि स्कूल के करीब 350 विद्यार्थी बैलगाड़ी से रोज स्कूल आते-जाते हैं। वर्तमान समय में स्कूल के पास 10 बैलगाड़ियां हैं। एक बैलगाड़ी में 30 से 35 छात्र सवार होकर आते हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों की बढ़ती संख्या को देखते हुए बैलगाड़ियों की संख्या में इजाफा कर दिया जाएगा।

सिंह कहते हैं कि अगर इसका दूसरा पहलू देखें तो बसों के डीजल और रखरखाव के मुकाबले बैलगाड़ी में बहुत कम खर्च आता है। साथ ही पर्यावरण भी प्रदूषित नहीं होता और दुर्घटना की संभावना तो न के बराबर रहती है।

बैलगाड़ी से स्कूल आने वाले ज्यादातर वही विद्यार्थी होते हैं, जिनका घर स्कूल से 2 से 3 किलोमीटर की दूरी पर है। बैलगाड़ियों से विद्यार्थियों को लाने ले जाने के दौरान स्कूल प्रशासन की तरफ से उनकी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है।

स्कूल के उप प्रधानाचार्य नीरज सहगल ने कहा कि हर बैलगाड़ी में बकायदा चालक के साथ एक कंडक्टर नियुक्त है, जिस पर बच्चों को सुरक्षित स्कूल लाने और ले जाने की जिम्मेदारी रहती है।

स्कूल के रास्ते में विद्यार्थी कृष्ण भजन गाते हैं। बैलगाड़ी चालक बकायदा भजन गाने में उनका साथ देता है। छात्र नीलू प्रजापति कहता है कि बैलगाड़ी से स्कूल आने में बहुत आनंद की अनुभूति होती है।

बैलगाड़ी खड़ी करने के लिए स्कूल परिसर में एक गोशाला बनाई गई है, जहां बच्चों को छोड़ने के बाद बैल को रखा जाता है।

उत्तर प्रदेश बोर्ड से संबंद्ध इस स्कूल की स्थापना वर्ष 2002 में पांच कक्षाओं के साथ हुई थी। उस समय यहां 100 विद्यार्थी थे। विद्यार्थियों को लाने ले जाने के लिए एक बैलगाड़ी हुआ करती थी।

सहगल के मुताबिक वर्तमान समय में स्कूल में कक्षा 12 तक की पढ़ाई होती है। विद्यार्थियों की संख्या करीब 1000 है, जिनमें से ज्यादातर छात्राएं हैं।

अभिभावक भी स्कूल के प्रयास की सराहना करते हैं। वृंदावन के रहने वाले सुशील कश्यप(45) कहते हैं कि स्कूल का प्रयास स्वागत योग्य है। हम सबकी जिम्मेदारी बनती है कि हम पर्यावरण को प्रदूषणमुक्त बनाने में स्कूल के कदम का स्वागत करें।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+