परमाणु समझौते और कश्मीर पर पाक को नहीं मिली खास सफलता
वाशिंगटन, 25 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका के साथ संपन्न पहले सामारिक वार्ता में पाकिस्तान को अपने दो प्रमुख मुद्दों- भारत जैसा नागरिक परमाणु समझौता और कश्मीर पर मध्यस्थता- पर कोई खास सफलता हाथ नहीं लगी है।
बुधवार को पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के साथ पहले दौर की बातचीत के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन से जब यह सवाल पूछा गया कि क्या वाशिंगटन पाकिस्तान के साथ भारत की तरह परमाणु समझौते के लिए तैयार है तो उन्होंने इस पर कुछ स्पष्ट नहीं कहा।
हिलेरी ने कहा, "हमारा एजेंडा काफी विस्तृत है, जिसमें कई मुद्दे शामिल हैं, जैसा कि एक आपने उठाया है।" क्लिंटन अपने बयान में परमाणु शब्द का कोई जिक्र नहीं किया।
उन्होंने कहा, "हमने कहा है कि हम उन सभी मुद्दों पर पाकिस्तान की बात सुनेंगे जो वह उठाएगा।"
क्लिंटन ने कहा, "हम इस बारे में केवल घोषणा कर मीडिया में सुर्खिया बटोरने के बाद भूलने का काम नहीं सकते। ऐसे में पाकिस्तान के साथ हमारी जो बातचीत शुरू हुई है उसमें कई गंभीर मुद्दें है और उसपर आगे बढ़ने में समय लगेगा।"
हिलेरी ने कहा कि पाकिस्तान को ऊर्जा क्षेत्र में अमेरिका 12.5 करोड़ डॉलर की सहायता करेगा। कश्मीर, तालिबान और भारत में आतंकवाद जैसे मसले पर उन्होंने कहा कि उनका देश भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता को प्रोत्साहित करता रहेगा।
हिलेरी ने भारत-पाक के बीच वार्ता को महत्व देते हुए कहा कि दोनों मुल्कों को बातचीत के जरिए समस्याओं का हल निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे सभी को लाभ होगा।
हिलेरी ने कहा कि सभी को यह समझना चाहिए कि पाकिस्तान और भारत के साथ अमेरिका के सकारात्मक संबंध हैं।
उधर, कुरैशी ने कहा कि इस्लामाबाद अमेरिका और भारत के बीच द्विपक्षीय संबंधों का आदर करता है लेकिन ये संबंध पाकिस्तान की कीमत पर नहीं होने चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी नीति में जल्द ही बदलाव करना चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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