शीला बोलीं 'मैं सिर्फ नाम की मुख्यमंत्री हूं'
'दिल्ली की असुरक्षा के लिए मैं दोषी नहीं'
दीक्षित ने कहा, "मुझे भारत सरकार के एक मंत्रालय से दूसरे मंत्रालय का चक्कर काटना पड़ता है। मेरे पास जमीन नहीं है, मुझे इसके लिए कहना पड़ता है, उसे खरीदना पड़ता है। पुलिस भी मेरे पास नहीं है। जब भी लोग कहते हैं कि दिल्ली सुरक्षित नहीं है, तो वे मुझे दोषी ठहराते हैं। उन्हें यह नहीं पता होता कि पुलिस मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं है।"
अपनी स्थिति साफ करते हुए वह बोलीं कि दिल्ली पुलिस उनके नियंत्रण में नहीं है। साथ ही उन्होने ये भी कहा कि उनका नियंत्रण ना तो दिल्ली के नागरिक निकायों पर और न तो भू प्राधिकरण पर ही। दीक्षित शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित एशिया कॉरपोरेट कांफ्रेंस में आयीं हुईं थीं।
आखिर क्यों बेबाक हुईं शीला दीक्षित
दीक्षित ने यह बात उस समय कही जब उनसे सवाल पूछा गया कि दिल्ली का नेतृत्व करने के दौरान उन्हे किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा। दीक्षित के मुताबिक "कई सारे प्राधिकारों का होना सबसे बड़ी समस्या है। केंद्र सरकार के दिल्ली में होने के अपने लाभ भी हैं और इसका बहुत बड़ा नुकसान भी है, क्योंकि सभी मंत्रालय दिल्ली में स्थान चाहते हैं।"
हालांकि शीला दीक्षित इस कदर बेबाक कैसे हुईं, मतलब इस बेबाकी के पीछे उनका क्या प्रयोजन था। ये स्पष्ट नहीं हो सका। अगर दिल्ली उनके नियंत्रण में नहीं है तो किस के नियंत्रण में है ये उनकी कूटनीतिक जुमलेबाजी से सामने ना आ सका। लेकिन इसये ये जरूर जाहिर हुआ कि वह अपने अधिकार सीमित होने से असंतुष्ट हैं और मीडिया वालों से अपनी असमर्थता जताकर संदेश दे रही हैं कि दिल्ली पर उन्हे वास्तविक नियंत्रण दिया जाए।













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