गर्भनिरोधक गोलियां किशोरियों पर हो रही हैं बेअसर : अध्ययन

वेबसाइट 'डेलीमेल डॉट को डॉट यूके' के मुताबिक पिछले केवल छह वर्षो में आपातकालीन गर्भनिरोधक दवाओं का इस्तेमाल दोगुना हो गया है लेकिन ताजा आंकड़े बताते हैं कि इससे गर्भधारण या यौन संचरित संक्रमणों में कोई कमी नहीं आई है।

'कोचरेन लाइब्रेरी रिव्यू' के अध्ययन के परिणाम किशोर गर्भावस्था कार्यक्रम के तहत आपातकालीन गर्भनिरोधकों के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने के ब्रिटिश सरकार के फैसले के प्रति संशय पैदा करते हैं।

ब्रिटिश सरकार को उम्मीद थी कि गर्भनिरोधक गोलियां आसानी से उपलब्ध हो जाने से अनियोजित गर्भधारण और गर्भपात में कमी आएगी।

वर्ष 1996 में छह प्रतिशत महिलाओं ने गर्भपात कराया जबकि इन महिलाओं ने पहले आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल किया था। वर्ष 2002 में यह प्रतिशत बढ़कर दोगुना मतलब 12 प्रतिशत हो गया।

अध्ययन में कहा गया है कि जिन महिलाओं को आपातकालीन गर्भनिरोधक आसानी से उपलब्ध होते हैं और जिन्हें ये उपलब्ध नहीं हो पाते हैं उन दोनों ही प्रकार की महिलाओं के गर्भवती होने की समान संभावना होती है।

अमेरिका, भारत, चीन और स्वीडन की करीब 8,000 महिलाओं पर हुए अध्ययन में यह भी स्पष्ट हुआ है कि आपतकालीन गर्भनिरोधकों की उपलब्धता से कई व्यक्तियों के साथ यौन संबंध बनाने की प्रवृत्ति नहीं बढ़ी है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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