हेडली तक पहुंचने की भारत को उम्मीद (लीड-2)
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक के बाद चिदम्बरम ने संवाददाताओं से कहा, "हेडली अमेरिका में होने वाली किसी भी विदेशी न्यायिक सुनवाई में गवाही देने को तैयार हो गया है। हम हेडली तक पहुंचने की कोशिशें जारी रखेंगे, ताकि वह किसी अदालत में अपनी गवाही दे या पूछताछ के लिए खुद को प्रस्तुत करे।"
उन्होंने कहा, "मुंबई हमले में हेडली की भूमिका के संबंध में हमें पहले ही बहुत जानकारी मिल चुकी है। उस तक पहुंचने से हमें और जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिल जाएगा। हेडली गवाही देने को तैयार है। लिहाजा जब वह अदालत में गवाही देगा उस समय हमारे अधिकारियों के लिए उससे उसी अदालत में या वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए या फिर पत्र व्यवहार के जरिए उससे पूछताछ करने का एक अच्छा अवसर होगा।"
चिदम्बरम ने कहा, "मौत की सजा से बचने के लिए हेडली द्वारा सच कबूलना हमारे लिए झटका नहीं है। यद्यपि इसका अर्थ यह होता है कि उसे भारत, डेनमार्क या पाकिस्तान को प्रत्यर्पित नहीं किया जाएगा।"
चिदम्बरम ने कहा, "हमने अभी तक हेडली के प्रत्यर्पण के लिए याचिका नहीं दायर की है। हमें इंतजार करना होगा और देखना होगा कि हेडली के अदालत में पेश होने के बाद क्या कुछ घटता है।"
चिदंबरम ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ दो देशों में आपराधिक मामले दर्ज होते हैं तो स्थिति जटिल हो जाती है।
चिदम्बरम ने कहा, "उसने यदि हमारे देश में अपराध किया है और अमेरिका में वांछित है, तो प्रत्यर्पण और आसान होना चाहिए। चूंकि अमेरिका में भी वह आरोपी है, इसलिए इसमें थोड़ी दिक्कत है।"
उन्होंने कहा, "मुंबई हमले में छह अमेरिकी नागरिक भी मारे गए थे। इसके चलते संघीय जांच एजेंसी (एफबीआई) ने उस पर मुकदमा चलाया। हमें पता है कि उसके प्रत्यर्पण में परेशानियां हैं।"
उल्लेखनीय है कि हेडली ने गुरुवार को शिकागो की एक अदालत में मुंबई हमले की साजिश में शामिल होने का आरोप स्वीकार किया है। उसने आतंकवाद से जुड़े सभी 12 आरोपों को कबूल कर लिया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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