अस्पताल के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा अनिवासी भारतीय

कोलकाता, 15 मार्च (आईएएनएस)। भारतीय मूल के एक अमेरिकी ने कोलकाता के एक अस्पताल के खिलाफ न्यायालय के फैसले को नजरअंदाज करने के मामले में सर्वोच्च यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

चिकित्सा लापरवाही के कारण पत्नी की मौत के बाद अदालत ने अस्पताल को अनिवासी भारतीय को पांच लाख रुपये हर्जाना देने का निर्देश दिया था जिसे अस्पताल ने नजरअंदाज कर दिया था।

अमेरिका में ओहियो स्थित कोलंबस एचआईवी-एआईडीएस अनुसंधान केंद्र के कुणाल साहा ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। साहा ने यह उल्लेख किया है कि कोलकाता के एडवांस्ड मेडिकेयर रिसर्च इंस्टीट्यूट और उसके प्रबंध निदेशक मणि के. छत्री ने सात महीने पहले अदालत द्वारा दिये गए आदेश की अवमानना की है।

वरिष्ठ वकील टी.वी. जॉर्ज के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय में दायर किए गए अपने मुकदमें में साहा ने कहा है कि गत वर्ष 9 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय ने प्रतिष्ठित अस्पताल और कोलकाता के चार प्रतिष्ठित चिकित्सकों को अनुराधा की मौत का जिम्मेदार ठहराया गया था। अनुराधा एक बाल रोग विशेषज्ञ थी। अस्पताल में ही सुकुमार मुखर्जी, अबनी राय चौधरी, वैद्यनाथ हलदर और बलराम प्रसाद की देखरेख में चल रहे इलाज के दौरान ही अस्पताल में अनुराधा की मौत हो गई थी।

अदालत ने मुआवजे की राशि के निर्धारण के लिए अस्पताल और चार चिकित्सकों को इस मामले को राष्ट्रीय उपभोक्ता निवारण अयोग के पास भेज दिया लेकिन अभी तक साहा को मुआवजा नहीं मिल पाया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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