बरेली में साम्प्रदायिक हिंसा का मामला लोकसभा में गूंजा
सपा नेता मुलायम सिंह यादव ने शून्यकाल में इस मामले को उठाते हुए कहा कि बरेली में जारी साम्प्रदायिक तनाव के लिए प्रदेश की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सरकार जिम्मेदार है। उन्होंने कहा, "बरेली हिंसा की आग में जल रहा है और वहां की मुख्यमंत्री मायावती 250 करोड़ की रैली में व्यस्त है।"
इस मामले में केंद्र सरकार को भी आड़े हाथों लेते मुलायम ने कहा कि राज्य सरकार तो हाथ पर हाथ धरे बैठी है लेकिन केंद्र सरकार भी एक मूकदर्शक बनी हुई है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि इस घटना में सबसे अधिक नुकसान मुसलमानों का हुआ है।
कांग्रेस के जगदम्बिका पाल ने भी इस मामले के केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा, "बरेली की जनता पस्त है और मुख्यमंत्री मायावती रैलियों में मस्त है। केंद्र सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए।"
इस मामले पर भाजपा और सपा नेताओं के हंगामे के कारण भोजनावकाश से आधे घंटे पहले सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी गई।
लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद भाजपा की मेनका गांधी ने बरेली की घटना के लिए राज्य प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए इस मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की। भाजपा के ही योगी आदित्यनाथ ने बरेली में साम्प्रदायिक हिंसा के लिए बसपा और कांग्रेस को दोषी ठहराया और साथ ही दोनों पर राज्य में दंगे फैलाने के लिए मिलीभगत करने का भी आरोप लगाया।
जनता दल (युनाइटेड) के शरद यादव ने इस मामले में केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि वहां राजनीतिज्ञों को जाने से रोका जा रहा है। चौदह दिनों से वहां साम्प्रदायिक तनाव है राज्य सरकार इस पर काबू पाने विफल रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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