भारत का अफ्रीका के साथ विकास और खाद्य सुरक्षा पर जोर (लीड-1)
विदेश मंत्री एस. एम. कृणा ने सोमवार को इस सम्मेलन में कहा, "अफ्रीका में क्षमता निर्माण और कौशल विकास से जुड़े कार्यक्रमों को सहयोग देने में निजी क्षेत्र की भूमिका प्रमुख है।" उन्होंने कहा कि वर्ष 2008 में आयोजित पहली भारत-अफ्रीका शिखर बैठक के दौरान लिए गए निर्णयों के संबंध में एक संयुक्त कार्रवाई योजना का खाका तैयार किया गया है।
कृष्णा ने कहा, "इस योजना में सहस्राब्दी विकास लक्ष्यों (एमडीजीएस) को पूरा करने में अफ्रीकी देशों की मदद करना भी शामिल है।" उन्होंने कहा कि अफ्रीका के विकास कार्यक्रमों के लिए की गई वित्तीय प्रतिबद्धताओं को भी तेजी से पूरा किया जाएगा।
इसी सम्मेलन में शिरकत रहे केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने कहा, "उभरती वैश्विक अर्थव्यस्था में भारत और अफ्रीका का प्रमुख स्थान है। पश्चिमी देशों में आई आर्थिक मंदी के दौरान इन दोनों क्षेत्रों (भारत, अफ्रीका) की आर्थिक ताकत को देखा गया। भारत और अफ्रीकी देशों के समक्ष गरीबी उन्मूलन और खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाने की चुनौती आगे भी बनी रहेगी।"
शर्मा ने कहा कि तेज आर्थिक प्रगति की वजह से भारत और अफ्रीका को गरीबी जैसी भयावह समस्या से निपटने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि वैश्विक जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे भी गरीबी के मुद्दे से जुड़े हुए हैं।
शर्मा ने कहा, "भारत और अफ्रीकी देशों को विकास की दिशा में जरूरी रास्तों को अख्तियार करने पर जोर देना चाहिए। दोनों को वैश्विक संगठनों में सुधार के लिए और भी सक्रिय होने की आवश्यकता है।"
सम्मेलन में घाना के उप राष्ट्रपति जॉन द्रमानी महामा ने अपने संबोधन में कहा कि अफ्रीका की प्रगति के लिए बुनियादी ढांचे का विकास होना जरूरी है और भारत इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा, "अफ्रीका तेजी से विकास कर रहा है और वर्ष 2010-11 में विकास दर चार से पांच फीसदी रहने का अनुमान है।" उन्होंने खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में भारत की भूमिका को भी महत्वूपर्ण बताया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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