कौन सुनता है दर्द की ये दास्तां...?

कौन सुनता है दर्द की ये दास्तां...?

हिंदी का एक विदा का गीत है... मैं तो छोड़ चली बाबुल का देस, पिया का घर प्यारा लगे. दशकों से यह गाना लोकप्रिय रहा है पर अफ़सोस पिया का देस छोड़ने वाली कई महिलाओं के लिए यह बिल्कुल जले पर नमक जैसा है.

पिया का देस छोड़कर कितनी ही महिलाएं दक्षिण एशिया से दहलीज लांघती हैं और जाती है विलायत... ब्रिटेन में अपने पति के पास. एक सुखद स्वप्न सजाए अपनी आंखों में जिसमें होते हैं कितने ही रूपहले रंग.

पर बानगी यह भी है-

"मुझे मेरी सास से बुरी तरह पीटा, इतना कि मेरे मुंह और नाक से ख़ून निकल रहा था. मुझे घर का सुबह से रात तक सारा काम करना पड़ता था. खाना बनाना, सफ़ाई, कपड़े, पोछा, डस्टिंग, सिलाई... एक कमरे में बंद रखा जाता था और टीवी तक देखने की इजाज़त नहीं थी. मैंने दो बार आत्महत्या की कोशिश भी की."

यह बयान है एक महिला का जो दक्षिण एशिया से शादी के बाद ब्रिटेन में अपनी पति और ससुराल वालों के पास रहने गई. इस बयान का सच केवल इसका भर ही नहीं है. यह दास्तां और दर्द कई महिलाओं का साझा है.

बीबीसी को प्राप्त जानकारी के मुताबिक दक्षिण एशिया से ब्रिटेन आकर विवाह करने वाली अनेक महिलाओं के साथ ससुराल में घरेलू नौकरों की तरह बर्ताव होता है.

वर्ष 2008-09 में आवास के लिए आवेदन करने वाली महिलाओं में से 500 से अधिक को शादी टूटने के बाद देश से बाहर निकाल दिया गया.

ये महिलाएं साबित नहीं कर पाईं कि इनके साथ किसी तरह का उत्पीड़न हुआ है. पुलिस और सामाजिक संस्थाओं को चिंता है कि घरेलू दबाव के डर से महिलाएं इन घटनाओं को दर्ज नहीं करातीं.

यूके बॉर्डर एजेंसी ने कहा कि ऐसे उत्पीड़न को रोकने के उपाय अपनाए जा रहे हैं.

मुश्किलें

उत्पीड़न की शिकार ये महिलाएं भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश की हैं.

करीब 20 साल के आस-पास की उम्र की एक महिला ने बताया कि उत्तरी इंग्लैंड स्थित उसके ससुराल में उसकी सास ने तीन साल तक उसे नजरबंद रखा.

इस महिला ने नाम नहीं छापने का अनुरोध किया.

घरेलू हिंसा की शिकार अश्वेत व एशियाई महिलाओं की एक राष्ट्रीय संस्था इमकान की ओर कराए गए एक शोध के मुताबिक एशियाई महिलाओं को उत्पीड़न का मामला दर्ज करवाने में काफी मुश्किलें आती हैं.

इस शोध में 124 महिलाओं को शामिल किया गया था.

इमकान की डॉयरेक्टर मराई लरासी का कहना है, ‘‘इन महिलाओं को अपने साथ हुए उत्पीड़न का खुलासा करने के मौके नहीं मिल पाते हैं. असल में महिलाओं को इस संबंध में मदद देने वाली सेवाओं की कमी है.’’

ब्रिटेन में गृह मंत्रालय के नियमों के मुताबिक अगर दो साल के भीतर किसी विदेशी नागरिक की शादी घरेलू हिंसा की वजह से टूटती है तो वह महिला अनिश्चित काल तक रहने के लिए आवेदन कर सकती है. लेकिन संबंधित अधिकारी को उत्पीड़न के बारे में उसी समय जानकारी देनी होगी.

पुलिस का मानना है कि कुछ समुदायों में यह समस्या बड़े पैमाने पर फैली हुई है.

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