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बुन्देलखंड में 18 दिन में खर्च होंगे 86 करोड़ रुपये!

By Staff
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चालू वित्त वर्ष के 11 माह में 5 अरब 52 करोड़ खर्च होने के बाद भी बुन्देलखंड की तस्वीर भयावह बनी हुई है। रोजी-रोटी की तलाश में लाखों लोग परदेश पलायन कर रहे हैं।

बुन्देलखंड के सात जनपदों- बांदा, चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर, उरई, जालौन, ललितपुर व झांसी को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (महानरेगा) के अन्तर्गत चालू वित्त वर्ष में 6 अरब 38 करोड़ रुपये मिले थे। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि 28 फरवरी तक 5 अरब 52 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

86 फीसदी धन खर्च होने के बाद 54 फीसदी कार्य अधूरे पड़े हैं। चित्रकूट मंडल के बांदा में 82 करोड़ रुपये में से 81 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसी तरह चित्रकूट में 90 में से 61 करोड़ रुपये, महोबा में 59 में से 49 करोड़ रुपये व हमीरपुर में 104 में से 91 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

इस प्रकार 53 करोड़ रुपये की राशि सरकारी खजाने में बची पड़ी है। झांसी मंडल के झांसी ने 101 करोड़ में से 87 करोड़ रुपये, ललितपुर ने 80 करोड़ रुपये में से 67 करोड़ रुपये व उरई तथा जालौन ने 122 करोड़ में से 101 करोड़ रुपये खर्च किए।

यहां के तीन जनपदों में 33 करोड़ रुपये बचे हुए हैं। समूचे बुन्देलखंड में प्रस्तावित कायरें पर नजर डालें तो बांदा में 1384 कार्य अधूरे पड़े हुए हैं। चित्रकूट में 847 पूरे और 2057 अधूरे, हमीरपुर में 1153 पूरे व 1641 अधूरे, महोबा में 940 पूरे व 1187 अधूरे हैं।

इसी प्रकार झांसी में 3303, उरईज़ालौन में 3638 व ललितपुर में 2011 कार्य अधूरे पड़े हैं। यह सरकारी आंकड़े हैं। समाजसेवी नसीर अहमद ने इन आंकड़ों को बुन्देलखंड के सातों जनपदों से जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत हासिल किए हैं। शेष बची 14 प्रतिशत रकम यानी 86 करोड़ रुपये से अधूरे पड़े 54 फीसदी कार्य को 31 मार्च तक पूरा करने की होड़ मची हुई है।

इतनी कम राशि में आधे से ज्यादा अधूरे कार्य किसी जादू-मंतर से ही पूरे किए जा सकते हैं। कागजों की बाजीगरी में यहां का प्रशासन सुर्खियों में रहा है। अपनी तिकड़म से इसने एक साल में 51 हजार शिक्षित बेरोजगार घटाएं हैं। तल्ख सच्चाई यह है कि सूखे का दंश झेल रहे बुन्देलखंड की तस्वीर भयावह होती जा रही है। लाखों की तादाद में मजदूर पलायन कर गए हैं।

चित्रकूट मंडल के आयुक्त ओ.पी.एन. सिंह ने शनिवार को बताया कि सभी जिला अधिकारियों व मुख्य विकास अधिकारियों को तेजी से कार्य कराने के निर्देश दिए गए हैं। सीडीओ बांदा हीरामणि मिश्रा का कहना है कि महानरेगा के कार्यो में तेजी लाई गई है।

झांसी के संयुक्त विकास आयुक्त ओ.पी. वर्मा ने बताया कि 8 मार्च को लखनऊ में हुई महानरेगा की बैठक में झांसी, जालौन व ललितपुर को क्रमश 40 हजार, 45 हजार व 39 हजार रुपये, प्रतिदिन लेबर चार्ज दिए जाने का लक्ष्य दिया गया है। ललितपुर का कार्य संतोषजनक है, झांसी व जालौन को लक्ष्य पूरा करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। मजदूरों के पलायन पर वे कहते हैं कि 100 दिनों का रोजगार नाकाफी है। लोग रोजी-रोटी की तलाश में परदेश तो जाएंगे ही।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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