तमिल पार्टी ने अलग राष्ट्र की माँग छोड़ी

श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों की सबसे करीबी मानी जाने वाली पार्टी तमिल नेशनल एलायंस (टीएनए) ने अलग तमिल राष्ट्र की माँग छोड़ दी है.
टीएनए को अल्पसंख्यक तमिलों का प्रतिनिधि दल माना जाता है. पार्टी ने अपने रुख़ में बदलाव करते हुए कहा है कि वह किसी भी संघीय समाधान के लिए तैयार है.
पार्टी अब चाहती है कि तमिल बहुसंख्यक दो प्रांतों का आपस में विलय कर दिया जाए और वहां की सरकार को स्वायत्तता दी जाए.
पार्टी ने अप्रैल माह में होने वाले संसदीय चुनावों के लिए जारी घोषणापत्र में नए रुख़ को सार्वजनिक किया है.
टीएनए का गठन नौ साल पहले हुआ था और तभी से इसे तमिल विद्रोहियों का समर्थक माना जाता रहा है.
हालाँकि पिछले साल हुई लड़ाई में तमिल विद्रोहियों की हार हो गई और उनके ठिकाने अब सरकारी नियंत्रण में हैं.
तमिल विद्रोही सत्तर के दशक से ही अल तमिल राष्ट्र यानी तमिल ईलम की माँग कर रहे थे और टीएनए ने इसका समर्थन किया.
लेकिन विद्रोहियों की हार के दस महीने बाद अब टीएनए के रुख़ में बड़ा परिवर्तन आया है.
पार्टी के घोषणापत्र में कहा गया है कि समस्या का समाधान मौजूदा संघीय ढाँचे के तहत सत्ता की साझीदारी से हो सकता है.
पिछले महीने पार्टी के नेता राजवरोथियम संपंथन ने बीबीसी से कहा था कि अधिकतर तमिल हिंसा या अलगाववाद में विश्वास नहीं रखते लेकिन वे बराबरी का हक़ चाहते हैं.
एक अन्य नेता सुरेश प्रेमचंद्रन ने शनिवार को बीबीसी से कहा कि वैश्विक और क्षेत्रीय स्थिति में बदलाव को देखते हुए मौजूदा संघीय ढांचे में ही समस्या का समाधान संभव है.
हाल के दिनों में टीएनए में बिखराव भी देखने को मिला है और इसके कुछ सदस्यों ने अलग संगठन बनाया है.












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