पाकिस्तान में नहीं मिलता संस्कृति के लिए सहयोग : शीमा किरमानी
नई दिल्ली, 13 मार्च (आईएएनएस)। पाकिस्तान की रंगमंच निर्देशक शीमा किरमानी कहती हैं कि भारतीय और पाकिस्तानी एक जैसे हैं और दोनों ही जगहों के लोग शांतिपूर्ण स्थितियों में रहना चाहते हैं। किरमानी महसूस करती हैं कि उनके देश में सांस्कृतिक गतिविधियों को संस्थागत समर्थन नहीं मिलता है।
किरमानी ने राजधानी में आईएएनएस से कहा, "यदि मुझे दोनों देशों, भारत व पाकिस्तान को एक संदेश देने के लिए कहा जाए तो मैं कहूंगी कि हम वही लोग हैं जो शताब्दियों से शांति और सद्भाव के साथ रहते रहे हैं।"
उनके कराची स्थित थियेटर समूह 'तहरीक-ए-निस्वान' ने गुरुवार को राजधानी में 'लीला-द साउथ एशियन वूमेंस थियेटर फेस्टिवल' के तहत 'जंग अब नहीं होगी' नाटक का मंचन किया था। पाकिस्तान में महिला अधिकारों के सांस्कृतिक मुखपत्र के रूप में 1979 में इस थियेटर समूह की स्थापना हुई थी।
किरमानी कहती हैं कि पाकिस्तान के थियेटर में शताब्दियों से कोई तब्दीली नहीं हुई है।
उन्होंने कहा, "सबसे बड़ी परेशानी यह है कि हमें संस्कृति के लिए सरकारी और संस्थागत सहयोग नहीं मिलता है। भारत की तरह ही वहां भी टेलीविजन और व्यवसायिक थियेटर को बढ़ावा मिल रहा है और अर्थपूर्ण थियेटर के पास खुद को जिंदा रखने के साधन नहीं हैं। हमें दोस्तों, अलाभकारी समूहों, सहानुभूति रखने वालों से आर्थिक मदद लेनी पड़ती है और कभी-कभी तो हम इसमें खुद का पैसा लगाते हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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