पुरस्कार लेकर लौटी पत्नी को मिली पति की दुत्कार

भुवनेश्वर, 13 मार्च (आईएएनएस)। एक तरफ जहां केंद्र सरकार महिला आरक्षण विधेयक को अमली जामा पहनाने की कवायद में जुटी हुई है, वहीं दूसरी तरफ भुवनेश्वर में एक महिला को उस समय काफी शर्मसार होना पड़ा जब नई दिल्ली से पुरस्कार ग्रहण कर घर लौटने पर उसके पति ने घर में घुसने नहीं दिया।

महिला का कसूर सिर्फ इतना था कि वह पुरुष अधिकारियों के साथ दिल्ली में पुरस्कार ग्रहण करने चली गई थी।

कालाहांडी जिले के कुसुमजोर गांव की 40 वर्षीय महिला मथुरा साबर नई दिल्ली में 26 फरवरी को केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार से पुरस्कार हासिल करने कृषि अधिकारियों के साथ गई थीं।

यह पुरस्कार उन्हें मशरूम की खेती में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया है। लेकिन जब वह पुरस्कार ग्रहण कर वापस अपने घर लौंटी तो पति ने उसे घर में प्रवेश करने से रोक दिया।

काबिलेगौर है कि मथुरा साबर को देश के 101 किसानों में चुना गया था। वह राज्य के संयुक्त निदेशक और चार अन्य अधिकारियों के साथ दिल्ली गई थी।

इस तरह पुरस्कार पाने की खुशी उस महिला के चेहरे पर कुछ क्षणों तक ही रह पाई। क्योंकि उसके पति रतन ने उसे घर में घुसने से रोक दिया।

वर्ष 1997 से 2002 के बीच रिसागांव पंचायत की सरपंच रह चुकीं मथुरा साबर ने आईएएनएस को बताया, "जब मैं दिल्ली से वापस लौटी तो मेरे पति ने मुझे घर में जाने से रोक दिया। मेरी समझ में यह नहीं आ रहा था कि मैं कहां जाऊं।" वर्तमान में मथुरा महिलाओं की सहायता करने वाले एक स्वयं सेवी समूह चला रही हैं।

उन्होंने कहा कि मेरे पति ने मेरे चरित्र पर सवाल खड़ा किया है, लेकिन दिल्ली जाने से पहले मैंने उनकी अनुमति ली थी।

मथुरा साबर के नाम को मंजूरी देने वाले जिला कृषि अधिकारी उनकी सहायता करने मे असहाय साबित हो रहे हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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