झारखण्ड में अधर में लटका बंगाली छात्रों का भविष्य
रांची, 12 मार्च (आईएएनएस)। झारखण्ड में चल रही माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक परीक्षाओं में बांग्ला भाषा में परीक्षा देने की अनुमति न मिलने पर परेशानी का सामना कर रहे हजारों बंगाली छात्रों मामला शुक्रवार को विधानसभा में उठा।
परीक्षा पिछले महीने फरवरी के अंतिम हफ्ते से जारी है, लेकिन 'झारखण्ड एकेडमिक काउंसिल' (जेएसी) ने इस वर्ष बांग्ला भाषा में परीक्षा नहीं कराने का फैसला लिया है। इसकी जानकारी छात्रों को केवल दो महीने पहले दी गई।
गौरतलब है कि पिछले साल कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षा तीन भाषाओं अंग्रेजी, हिंदी और बांग्ला में हुई थी।
मार्क्सवादी समन्वय समिति दल के विधायक अरूप चटर्जी ने कहा, "अविभाजित बिहार में बांग्ला भाषियों की आबादी मौजूदा झारखण्ड क्षेत्र में होने के बावजूद माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक परीक्षा बंगाली में भी आयोजित किए जाते थे। राज्य सरकार को बांग्ला भाषा में भी परीक्षा संपन्न कराना सुनिश्चित करना होगा।"
मानव संसाधन विकास मंत्री हेमलाल मुर्मू ने सदन में बताया, "वर्ष 2005 में तैयार किए गए परीक्षा नियमन संहिता के मुताबिक माध्यमिक और उच्चतर माध्यामिक परीक्षाएं केवल हिंदी और अंग्रेजी में आयोजित की जानी चाहिए।"
राष्ट्रीय जनता दल (जदयू) की विधायक अन्नपूर्णा देवी ने परीक्षा नियमन संहिता 2005 में संशोधन की मांग की।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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