एचआईवी संक्रमितों के लिए आशा की किरण

मौजूदा समय में एचआईवी संक्रमित हाइली एक्टिव एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी (एचएएआरटी) नामक दवा का प्रयोग करते हैं। हाल ही में कनाडाई और अमेरिकी शोधकर्ताओं ने इसी दवा में नया अवयव जोड़कर एक प्रभावशाली दवा तैयार करने का दावा किया है।

मोंट्रियल विश्वविद्यालय, मैकगिल विश्वविद्यालय और वेसिन एंड जीन थेरेपी इंस्टीट्यूट ऑफ फ्लोरिडा (वीजीटीआई) के शोधकर्ताओं ने इस संबंध में एक रिपोर्ट तैयार की है।

प्रमुख शोधकर्ता रैफिक पीरे सेकले ने कहा कि एचआईवी संक्रमितों के लिए पीडी-1 नामक रासायनिक अवयव एक आशा की किरण की तरह है। उन्होंने कहा कि एचएएआरटी में कुछ बदलाव से संक्रमितों को फायदा हो सकता है।

शोधकर्ताओं की रिपोर्ट विज्ञान पत्रिका 'नेचर मेडिसिन' के ताजा अंक में प्रकाशित हुई है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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