मानव अधिकार मामलों की जांच समिति बनाने से श्रीलंका का इंकार
श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने कहा कि इस प्रस्ताव का उद्देश्य अनुचित है और ऐसे कदम को श्रीलंका के आतंरिक मामलों में हस्तक्षेप के समान माना जाएगा।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की-मून के साथ एक टेलीफोन वार्ता में राजपक्षे ने कहा, "यह कदम पूरी तरह अप्रत्याशित और अनुचित है। उन देशों के खिलाफ भी ऐसे कदम नहीं उठाए गए, जहां हिंसक संघर्षो में भारी संख्या में नागरिकों की मौत हुई।"
मून ने 25 फरवरी को लिखे एक पत्र में मानव अधिकार उल्लंघन के मामलों की जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति के गठन का प्रस्ताव रखा था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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