मैं भारत से प्रेम करता हूं, लेकिन देश ने मुझे खारिज कर दिया : एम.एफ.हुसैन
नई दिल्ली, 2 मार्च (आईएएनएस)। प्रख्यात चित्रकार एम.एफ.हुसैन ने गहरी पीड़ा के साथ कहा कि जब दक्षिणपंथी ताकतें उन पर हमला बोल रही थीं तो उस समय देश के राजनेता, बुद्धिजीवी और कलाकार, सभी चुप्पी साधे हुए थे।
हुसैन ने केरल के मलयालम दैनिक 'माध्यमम' के दोहा संस्करण 'गल्फ माध्यमम' के साथ एक साक्षात्कार में कहा, "मैं अभी भी भारत से प्रेम करता हूं। लेकिन भारत को मेरी जरूरत नहीं है। मैं यह बात अपने भीतर की गहरी पीड़ा के साथ कह रहा हूं।"
कतर की नागरिकता स्वीकार करने के बाद अपने पहले साक्षात्कार में हुसैन ने कहा है, "भारत मेरी मातृभूमि है। मैं अपनी मातृभूमि से घृणा नहीं कर सकता। लेकिन भारत ने मुझे खारिज कर दिया। ऐसे में मुझे भारत में क्यों रहना चाहिए?"
हुसैन ने कहा, "जब संघ परिवार ने मेरे ऊपर हमला किया तो उस समय सभी चुप्पी साधे रहे। राजनीतिक नेतृत्व, कलाकारों या बुद्धिजीवियों में से किसी ने भी मेरे पक्ष में आवाज नहीं उठाई। लेकिन मैं इस सच्चाई को जानता हूं कि भारत की 90 प्रतिशत जनता मुझे प्यार करती है। वे सभी मेरे साथ हैं। कुछ राजनेताओं सहित केवल 10 प्रतिशत लोग मेरे खिलाफ हैं।"
ज्ञात हो कि हुसैन के खिलाफ देश में दर्जनों कानूनी याचिकाएं दायर हैं। कुछ हिंदू उन पर देवी-देवताओं के अश्लील चित्र बनाने का आरोप लगाते हैं। हुसैन 2006 से ही शरणार्थी के रूप में विदेश में रह रहे हैं।
उन्होंने कहा है कि वह बिल्कुल चिंतित नहीं हैं, क्योंकि दुनिया भर के लोग उन्हें प्रेम करते हैं।
हुसैन ने कहा, "भारत की सरकारें मेरी हिफाजत नहीं कर सकीं। इसलिए इस तरह के देश में निवास करना मेरे लिए बहुत कठिन है। राजनेताओं की नजर सिर्फ वोट पर है।"
हुसैन ने कहा, "कतर में मैं पूरी आजादी का आनंद ले रहा हूं। अब कतर ही मेरा स्थान है। यहां मेरी अभिव्यक्ति की आजादी पर किसी का अंकुश नहीं है। मैं यहां बहुत खुश हूं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications