लखनऊ में भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हिंसक झड़प (लीड-1)

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को काबू में करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और वाटर कैनन का प्रयोग किया। जवाब में भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी पुलिस पर पथराव किया। इस दौरान एक तरफ जहां लगभग 50 से ज्यादा भाजपा कार्यकर्ता और नेता घायल हुए वहीं कुछ पुलिसकर्मियों को भी चोटें आईं हैं।

भारतीय जनता युवा मोर्चा के नेता पंकज सिंह ने संवाददाताओं को बताया कि पुलिस द्वारा किए गए बर्बर लाठीचार्ज में घायल हुए 100 से ज्यादा कार्यकर्ताओं और नेताओं को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। पुलिस द्वारा चलाई गई रबर की गोली से घायल एक कार्यकर्ता की हालत नाजुक बनी हुई है।

उधर पुलिस ने दावा किया है कि कुछ प्रदर्शनकारी मामूली रूप से चोटिल हुए हैं। किसी को गंभीर चोट नहीं आई है।

भाजपा के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा कि वरिष्ठ नेताओं की अगुवाई में पार्टी कार्यकर्ता शांतिपूर्ण मार्च करने जा रहे थे तभी पुलिस ने बेवजह बल प्रयोग किया और रबर की गोलियां चलाईं, जिसमें हमारे कई कार्यकर्ता और कई वरिष्ठ नेता घायल हो गए।

उन्होंने कहा कि वह स्वयं सिर पर कुर्सी रखकर पुलिसकर्मियों से अपील कर रहे थे कि वे पत्थर, आंसू गैस के गोले और रबर की गोलियां चलाना बंद कर दें, लेकिन पुलिस का अत्याचार बंद नहीं हुआ। मायावती की इससे बड़ी तानाशाही नहीं हो सकती है। भाजपा राज्य सरकार के इस अत्याचार के मामले को संसद में उठाएगी।

तय कार्यक्रम के मुताबिक गुरुवार को भाजपा के केंद्रीय नेताओं को लखनऊ के गोमती नगर इलाके में स्थित झूलेलाल वाटिका में आयोजित राज्यव्यापी रैली में कार्यकर्ताओं को संबोधित करना था। उसके बाद प्राजनाथ सिंह की अगुवाई में विरोध प्रदर्शन करते हुए कार्यकर्ताओं द्वारा विधान सभा का घेराव किए जाने की योजना थी।

राजनाथ सिंह, मुरली मनोहर जोशी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी, विनय कटियार सहित तमाम केंद्रीय नेताओं के संबोधन के बाद जैसे ही रैली समाप्त हुई, कार्यकर्ता और नेता विधानसभा जाने के लिए आगे बढ़ने लगे तभी वहां मौजूद भारी संख्या में पुलिस बल ने उन्हें रोक दिया, जिसके बाद पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई।

पुलिस की कार्रवाई से आक्रोशित भाजपा कार्यकर्ताओं ने लखनऊ के पुलिस अधीक्षक (ट्रांस गोमती) परेश पांडे को बंधक बना लिया था। राजनाथ सिंह के दखल के बाद कार्यकर्ताओं ने बाद में उन्हें जाने दिया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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