Datia Bypoll: 'शीश झुकाऊंगा और आशुतोष को जिताऊंगा', मंच पर रो पड़े नरोत्तम, खिलखिला कर हंसती रहीं इमरती देवी
Datia Bypoll: मध्य प्रदेश की राजनीति में चल रही रस्साकसी का आज उस वक्त पटाक्षेप हो गया जब टिकट कटने के बाद खुद पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा उनके हिस्से का टिकट ले गए आशुतोष तिवारी का नामांकन दाखिल करवाने पहुंचे। इस दौरान उनके साथ सूबे मुखिया मोहन यादव और प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी साथ रहे। 3 दिन से दतिया जिले में कट रहे गदर के बाद नरोत्तम मिश्रा को जिम्मेदारी दी गई अपने समर्थकों को संबोधित करने की।
मंच पर बुरी तरह रो पड़े नरोत्तम मिश्रा
अपने भाषण में मंच पर जनता और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए नरोत्तम मिश्रा बोले कि '16 तारीख से यहीं डेरा जमाएंगे, मेरे सारे कार्यकर्ताओं के साथ में दतिया के एक-एक दरवाजे पर अपना शीश झुकाऊंगा, एक-एक गांव के अंदर जाऊंगा और अपने आशुतोष को जीतऊंगा...धन्यवाद। 'ये वो लाइनें थीं जिनके साथ नरोत्तम मिश्रा ने अपने भाषण को विराम दिया। इतना कह पाते कि उसके बाद उनका गला भर आया और आवाज रुंध गई। वे अपनी कुर्सी की तरफ बढ़े तो मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उन्हें संभाला और हौसला अफजाई की।

रोते रहे नरोत्तम, हंसती रहीं इमरती देवी
मंच पर एक और तस्वीर लोगों ने देखी। दरअसल जब मिश्रा अपना भाषण पूरा कर भरा गला और नम आंखों के साथ अपनी कुर्सी पर लौटे तो उनके पीछे बैठीं बीजेपी की नेता और पूर्व में मंत्री रहीं इमरती देवी खिलखिला कर हंस रही थीं। ये सब तब हो रहा था जब सूबे के दो बड़े पदाधिकारी सीएम मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल आगे वाली कुर्सियों पर बैठे हुए थे। एक तरफ नरोत्तम मिश्रा थे, जिन्होंने दिल पर पत्थर रख पार्टी के अनुशासन का पालन किया और दूसरी तरफ इमरती देवी थीं जो न जाने किस बात पर इस माहौल में खिलखिला कर हंस रही थीं।
दतिया में कब है चुनाव?
दतिया में 30 जुलाई को उपचुनाव के लिए वोटिंग होगी और 3 अगस्त को इसके नतीजे आएंगे। इस बार मुकाबल दो नए उम्मीदवारों में है। जिसमें कांग्रेस की तरफ से घनश्याम सिंह और बीजेपी से आशुतोष तिवारी ताल ठोक रहे हैं। दोनों नेता राजनीति में लंबे अरसे से सक्रिय हैं लेकिन इनका ये मुकाबला एक-दूसरे के खिलाफ पहला होगा।
क्यों हो रहे उपचुनाव?
इस सीट पर 2023 के चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार राजेंद्र भारती जीते थे, लेकिन उन्हें एक मामले में कोर्ट से सजा हो गई और उनकी सीट चली गई। इसके बाद से ये सीट खाली थी, तभी से नरोत्तम मिश्रा अपनी पारम्परिक सीट से विधानसभा में वापस लौटने की तैयारी कर रहे थे। हालांकि पार्टी ने उनका टिकट काटकर पूरा मुकाबला ही बदल दिया।
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