आर्थिक समीक्षा : वर्ष 2011-12 में विकास दर 9 फीसदी रहेगी(मुख्य बिंदु)
-अर्थव्यवस्था में शानदार सुधार हुआ है। चालू वित्त वर्ष में इसमें 7.2 फीसदी की दर से वृद्धि का अनुमान।
- वर्ष 2011-12 में विकास दर के नौ फीसदी को पार करने की संभावना।
- चालू वित्त वर्ष में विनिर्माण क्षेत्र में विकास की दर 8.9 फीसदी रहेगी, जो पिछले वर्ष में 3.2 फीसदी थी।
- खाद्यान्न मुद्रास्फीति प्रमुख चिंता का विषय।
- वर्ष 2009-10 में प्रति व्यक्ति आय में 6.5 फीसदी की वृद्धि, जो वर्ष 2008-09 में 3.7 फीसदी थी।
- सकल राजकोषीय घाटा जीडीपी का 6.5 फीसदी रहने का अनुमान
- वर्ष 2009-10 के दौरान तरलता की स्थिति संतोषप्रद रही
- उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 15 जनवरी 2010 तक बैंक ऋण में 13.9 फीसदी की वृद्धि, जबकि गैर खाद्यान्न ऋण में 8.7 फीसदी की वृद्धि।
- लक्ष्य से अधिक कृषि ऋण का वितरण हुआ। इस में निवेश में वृद्धि दर्ज की गई है। इसमें वर्ष 2007-08 में 16.5 फीसदी की और वर्ष 2008-09 में 26.0 फीसदी की वृद्धि हुई। वर्ष 2006-07 में निवेश में 1.4 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।
-निवेश - जमा का अनुपात बढ़कर 32.52 फीसदी हुआ।
- पूंजी प्रवाह में तेजी और विदेशी विनिमय कोष में बढ़ोतरी से भुगतान संतुलन में सुधार।
-अप्रैल से सितंबर 2009 के दौरान भारत में कुल 29.6 अरब अमेरिकी डॉलर की पूंजी आई, जो वर्ष 2008-09 के इसी अवधि के 12.0 अरब अमेरिकी डॉलर थी।
-वित्त वर्ष 2009-10 के दौरान विदेश विनिमय कोष में 31.5 अरब अमेरिकी डॉलर की वृद्धि हुई और यह मार्च 2009 के 252.0 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर दिसंबर 2009 के अंत तक 283.5 अरब अमेरिकी डॉलर हो गई।
-वर्ष 2010-11 के लिए वित्तीय नीतियों को बनाने में 13वें वित्त आयोग की सिफारिशों पर विचार करने की जरूरत।
- दूरसंचार क्षेत्र में विकास की गति जारी है। प्रति माह करीब 1.76 करोड़ नए उपभोक्ता बन रहे हैं।
-वर्ष 2009-10 के दौरान केंद्र सरकार ग्रामीण विकास सहित सामाजिक सेवाओं के लिए योजना और गैर-योजनागत व्यय 19.46 प्रतिशत तक पहुंच गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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