आग में मौतों के जिम्मेदार बेंगलुरूवासी भी

जरा सोचिए आखिर दमकल कर्मियों को बिल्डिंग तक पहुंचने में इतना वक्त क्यों लगा। क्या इसके लिए सिर्फ अग्निशमन विभाग जिम्मेदार है। जी नहीं। इसके लिए स्वयं बेंगलुरूवासी जिम्मेदार हैं। वे लोग जो इस हादसे को तमाशबीन खड़े देख रहे थे। कार्ल्टन टावर से गुजरने वाली रोड भी इतनी चौड़ी है, कि आसानी से फायर ब्रिगेड वहां तक पहुंच सकती है, लेकिन मंगलवार की शाम साढ़े चार बजे जब इस बिल्डिंग में आग लगी तो बिल्डिंग के चारों ओर लोगों की भीड़ जमा हो गई।
ट्रैफिक से जूझते रहे दमकल वाहन
रास्ते से निकल रहे लोगों ने अपनी-अपनी कारें और मोटरसाइकिलें वहीं रास्ते में रोक दीं और हादसे को तमाशे की तरह देखने लगे। इस दौरान हजारों गाडि़यां ट्रैफिक में फंस गईं। इस रास्ते पर कई डाइवर्जन होने के बावजूद ट्रैफिक इतना जाम हो गया, कि दमकल वाहन तक ट्रैफिक में फंसे दिखे। आग बुझाने पहुंची पहली फायर ब्रिगेड आधे घंटे के अंदर मौके पर पहुंच गई, लेकिन आग बुझाने के लिए वो काफी नहीं थी। उसके लिए शहर के अन्य इलाकों से 11 फायर ब्रिगेड गाडि़यां बुलानी पड़ीं। खास बात यह है कि बाकी के वाहनों को इमारत तक पहुंचने में करीब तीन से चार किलोमीटर तक घने ट्रेफिक से जूझना पड़ा।
मीडिया के भी क्या कहने
ऐसे समय में टेलीविजन चैनलों के पत्रकारों ने भी खूब रंग दिखाए। जो दमकलकर्मी आग बुझाने में जुटे हुए थे। जिनकी प्राथमिकता आग पर काबू पाना थी, टीवी रिपोर्टर उन्हें ही घेर कर खड़े हो गए। यहां सवाल यह उठता है कि क्या दमकल अधिकारियों का इंटरव्यू दिखाना उन नौ लोगों की जान से बढ़कर था, जो इस हादसे का शिकार हुए।
यही नहीं सबसे बड़ा सवाल उन बेंगलुरूवासियों के सामने खड़ा होता है, कि ऐसे समय में जब दमकल वाहनों के लिए रोड खाली कर देनी चाहिए, क्या रोड पर अपने वाहन खड़े कर तमाशा देखना जरूरी था? खैर ये सवाल सिर्फ बेंगलुरूवासियों के लिए नहीं हैं, ऐसा हर शहर में होता है। जब-जब ऐसा हादसा होता है, तमाशबीन लाइन लगाकर देखने खड़े हो जाते हैं। इस पर न तो सरकार कुछ कर सकती है, न पुलिस, यह बात सिर्फ आम आदमी को सोचनी होगी।
बंद थे फायर एक्जिट दरवाजे
अग्निशम अधिकारियों द्वारा की गई अबतक की जांच में पता चला है कि बिल्डिंग में फायर सेफ्टी नॉर्म्स का खयाल नहीं रखा गया। यही नहीं फायर एक्जिट दरवाजे भी बंद रहते थे। यही कारण है कि जब आग लगी तो लोग उस रास्ते से निकल नहीं सके। इस घटना में 60 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। इनमें अधिकांश लोग इमारत में भरे धुएं के बीच कुछ नहीं दिखाई देने पर घायल हुए।












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