प्रधानमंत्री ने बीटी बैंगन पर रोक बरकरार रखा

प्रधानमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने कहा कि मनमोहन सिंह ने जयराम रमेश के उस तर्क का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने कहा कि दुनिया के पहले जीन परिवर्धित (जीएम) खाद्य फसल (बीटी बैंगन) की खेती की अनुमति देने में एक सतर्क दृष्टि अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जहां सुरक्षा को लेकर समाज के सभी वर्गो को सहमत होने की आवश्यकता है, वहीं खाद्य सुरक्षा के लिए जैव प्रौद्योगिकी एक महत्वपूर्ण विकल्प भी है।

एक सरकारी प्रवक्ता ने कहा, "यह सच है कि जैव प्रौद्योगिकी उच्च कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कराने के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प है। सरकार जल्द ही राष्ट्रीय जैव प्रौद्योगिकी नियामक प्राधिकरण के गठन के लिए कदम उठाएगी। यह संस्था लोगों में विश्वास बढ़ाएगी और जैव प्रौद्योगिकी में निवेश के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों को प्रोत्साहित करेगी।"

प्रधानमंत्री आवास पर आयोजित बैठक में तीखी नोकझोक हुई। बैठक एक घंटे से अधिक समय तक चली। बैठक में जयराम रमेश, शरद पवार, पृथ्वीराज चव्हाण के अलावा मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने हिस्सा लिया।

जीएम खाद्य के प्रबल समर्थक पवार और चव्हाण ने बैठक में कहा कि बीटी बैंगन पर रोक से गलत संदेश जा रहा है और यह कृषि प्रौद्योगिकी में निवेश को रोक रहा है।

दोनों मंत्रियों ने कहा कि निजी और सार्वजनिक संस्थाओं द्वारा बीटी फसलों के विकास पर पहले ही काफी निवेश किया जा चुका है। यदि जीएम फसलों की खेती पर प्रतिबंध लगाया गया तो सारा किया-धरा पानी में चला जाएगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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