जयराम रमेश ने श्याम सरन के साथ मतभेदों को स्वीकारा (लीड-1)
इंडियन वूमेन्स प्रेस कॉर्प्स में यहां एक बातचीत के दौरान रमेश ने कहा, "मूल रूप से यह हमारी कार्यशैली और किसी समस्या से निपटने के हमारे दृष्टिकोण में भेद है। लेकिन मैं साफ कहता हूं कि उनके इस्तीफे के निर्णय से मेरा कुछ भी लेना-देना नहीं है।"
सरन ने 19 फरवरी को अपने इस्तीफे की घोषणा की थी। खबरों के मुताबिक सरन ने यह निर्णय जलवायु परिवर्तन वार्ता पर रमेश के साथ पैदा हुए मतभेदों के कारण लिया।
रमेश ने कहा, "हमने मिल कर काम करने की कोशिश की लेकिन हमारी कार्यशैली और समझ में भेद हैं। मैं एक राजनीतिक व्यक्ति हूं और वह एक नौकरशाह हैं।"
रमेश ने कहा कि वह संसद के प्रति जवाबदेह हैं और उन्हें उनके निर्णयों के बारे में संसद में जवाब देने जाना पड़ता है।
रमेश ने आगे कहा, "सच्चाई यह है कि जलवायु परिवर्तन पर जवाबदेह पर्यावरण मंत्रालय है। ऐसे में जो कुछ भी घटता है, उसके अच्छे-बुरे की जवाबदेही पर्यावरण मंत्रालय पर आती है। नीति बनाना मेरा काम है। मैं नौकरशाहों की सुनूंगा लेकिन नीतियों के मामले में नौकरशाही मुझे निर्देशित नहीं कर सकती।"
रमेश ने कहा, "मैं हर किसी से मशविरा करूंगा। लेकिन नीति निर्धारण के बाद सभी को मेरा समर्थन करना चाहिए। लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे देश में निर्णय ले लिए जाने के बाद भी बहस जारी रहती है।"
रमेश ने कहा कि श्याम सरन प्रधानमंत्री के विशेष दूत थे, न कि उनके ।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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