रेल बजट प्रतिक्रिया : बिहार में कोई खुश, कोई नाराज
पटना, 24 फरवरी (आईएएनएस)। रेल मंत्री ममता बनर्जी द्वारा पेश किये गये वर्ष 2010-11 के रेल बजट पर बिहार के लोगों ने मिलीजुली प्रतिक्रिया दी है। यात्री किराया न बढ़ने और बिहार में कुछ नई रेलगाड़ियों की घोषणा पर लोगों ने जहां खुशी का इजहार किया, वहीं प्रदेश की अन्य जरूरतों को पूरा न किए जाने पर नाराजगी भी जताई।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के महासचिव एवं पूर्व सांसद रामकृपाल यादव ने रेल बजट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि बिहार को रेल मंत्री ने 'लालीपॉप' थमाया है। उन्होंने कहा रेल मंत्री द्वारा संसद में पेश रेल बजट देश का नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल का रेल बजट है। यादव ने कहा कि रेल मंत्री द्वारा पिछले वर्ष पेश रेल बजट की घोषणाओं को कितना पूर्ण किया गया, यह अहम प्रश्न है।
पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता एम़ पी़ गुप्ता ने कहा कि रेल मंत्री ने बिहार को काफी कुछ देने का कोशिश की है। उन्होंने कहा कि तीर्थयात्रा रेलगाड़ी प्रारंभ करने से बिहार के लोगों को तीर्थयात्रा करने में आसानी होगी। उन्होंने कहा कि यात्री किराया और माल भाड़ा में वृद्घि न कर भी रेल मंत्री ने लोगों को राहत दी है।
पटना के जाने माने चिकित्सक डा. विजय कुमार ने कहा कि रेल बजट बिहार के लिए मिला-जुला है। दरभंगा से मुंबई तक एक्सप्रेस मिलना बिहार के लिए राहत है तो सुरक्षा के लिए बजट में कोई विशेष चर्चा नहीं है। उन्होंने कहा कि जो घोषणाएं हुई हैं उन पर अमल हो जाए तो यही काफी है। उन्होंने ग्राम पंचायत में रेलवे टिकट मिलने की घोषणा को सही कदम बताया।
पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल की छात्रा आस्था का कहना है कि पटना से लंबी दूरी तक का कोई रेलगाड़ी नहीं मिलना दुखद है तो बिहार में कोई दुरंतो रेल ने देना बिहार की उपेक्षा है। उन्होंने हालांकि किराया नहीं बढ़ाने और महिलाओं के लिए विशेष रेलगाड़ी चलाने की घोषणा को इस बजट की विशेषता करार दिया। वह कहती हैं कि बजट में क्षेत्रीय भाषाओं में परीक्षा लेने का प्रस्ताव क्षेत्रीयता को बढ़ावा देने वाला है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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