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राष्‍ट्रपति का अभिभाषण सरकारी विज्ञापन जैसा: भाजपा

Parliament of India
नई दिल्ली। बजट सत्र के पहले दिन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील द्वारा दोनों सदनों को संबोधित अभिभाषण को प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने सरकारी विज्ञापन करार दिया है। भाजपा का कहना है कि अभिभाषण में महज केंद्र सरकार की तारीफों के पुल बांधे गए हैं, न कि लोगों से जुड़ी समस्‍याओं पर प्रकाश डाला गया है।

भाजपा ने राष्ट्रपति के अभिभाषण को उस सरकारी विज्ञापन सरीखा करार दिया है जिसमें सरकारी कार्यक्रमों का संकलन होता है। पार्टी ने कहा है कि देश आज कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, लेकिन राष्ट्रपति के अभिभाषण में उनसे निपटने के उपायों की दिशा का स्पष्ट अभाव है।

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भाजपा संसदीय दल की ओर से जारी बयान में कहा गया, "खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के बोझ तले देश दबा हुआ है। राष्ट्रपति के अभिभाषण में इस दिशा में सरकार के रुख या उसकी किसी नीति का कोई जिक्र नहीं है। यह सरकार आम आदमी के प्रति असंवेदनशील है।"

पार्टी के मुताबिक, "राष्ट्रपति के अभिभाषण में कहा गया है कि देश में आंतरिक सुरक्षा की स्थिति नियंत्रण में है। ऐसा कहना आतंकवाद और नक्सलवाद जैसी समस्याओं को कमतर आंकना है। इन समस्याओं से कैसे निपटा जाए, इस बारे में राष्ट्रपति के अभिभाषण में कोई रोडमैप नहीं है।"

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पार्टी ने कहा है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में इस शर्त पर पाकिस्तान से वार्ता की वकालत की गई है कि वह अपनी सरजमीं से भारत के खिलाफ हो रही आतंकवादी गतिविधियों को नेस्तनाबूद करे, जबकि सरकार का रुख कुछ और ही है। पाकिस्तान में आतंकवादी ढांचा भारत के खिलाफ गतिविधियों में लिप्त है और भारत सरकार वार्ता की तैयारी कर रही है।

महिला आरक्षण विधेयक के बारे में पार्टी ने कहा कि सरकार ने इसे जल्द से जल्द संसद के दोनों सदनों से पारित कराने का आश्वासन दिया है। भाजपा उम्मीद करती है कि राष्ट्रपति के पिछले सात अभिभाषणों में महिला आरक्षण विधेयक का जो हश्र हुआ, कहीं इस बार भी महिला आरक्षण विधेयक का वही हश्र न हो जाए।

उधर, मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने भी महंगाई जैसे विषय पर सुधारात्मक उपायों का जिक्र न किए जाने के लिए राष्ट्रपति के अभिभाषण की आलोचना की। माकपा पोलित ब्यूरो की सदस्य वृंदा करात ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "सरकार का रवैया हमेशा की तरह है।" उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि महंगाई जैसे विषय पर सुधारात्मक उपायों का इसमें कोई जिक्र नहीं है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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