प्रोफेसर के निलंबन पर एएमयू और समलैंगिक अधिकार कार्यकर्ता आमने-सामने
अलीगढ़/नई दिल्ली, 21 फरवरी (आईएएनएस)। समलैंगिक संबंध में कथित तौर पर संलिप्त अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के एक प्रोफेसर के निलंबन के मुद्दे पर एएमयू प्रशासन और समलैंगिक अधिकारों के पक्षधर कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए हैं।
एएमयू के प्रोफेसर श्रीनिवास रामचंद्र सिरस को विश्वविद्यालय प्रशासन ने बीते नौ फरवरी को निलंबित कर दिया था। उनके एक रिक्शेवाले के साथ कथित तौर पर संबंध बनाने की बात कही गई थी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनकी इस कथित हरकत को 'सांस्कृतिक मूल्यों' के खिलाफ करार दिया है।
सिरस ने अपने निलंबन को यह कहते हुए गलत बताया कि उन्होंने जो कुछ भी किया, अपने घर में किया और यह उनका व्यक्तिगत मामला है। उनका कहना है कि उन्होंने कोई भी अपराध नहीं किया है। बताया गया है कि तीन लोगों ने बतौर पत्रकार उनके विश्वविद्यालय परिसर स्थित आवास में घुसकर कैमरा लगाया और उनकी कथित हरकतों को रिकॉर्ड कर लिया।
समलैंगिक अधिकारों से जुड़े कार्यकर्ता खुलकर प्रोफेसर सिरस के साथ आ गए हैं। समलैंगिक अधिकार कार्यकर्ता मोहनीश मल्होत्रा ने आईएएनएस से कहा, "जो लोग उनके घर में घुसे और कैमरा लगाया, उन लोगों ने प्रोफेसर सिरस की निजता में घुसपैठ की। इन लोगों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।"
मल्होत्रा ने कहा, "एएमयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के लिए यह शोभा नहीं देता कि उसने एक ऐसी बात के लिए प्रोफेसर को निलंबित कर कर दिया जो किसी तरह का अपराध नहीं है। इस मामले में विश्वविद्यालय ने किसी तरह की जांच भी नहीं की।"
उधर, एएमयू प्रशासन अपने इस निर्णय को सही ठहरा रहा है। विश्वविद्यालय में ही प्रोफेसर सिरस को बर्खास्त करने की मांग उठने लगी है। विश्वविद्यालय के प्रवक्ता राहत अबरार ने कहा कि इस तरह की हरकत पूरी तरह अनुचित है। अबरार ने कहा, "समलैंगिकतार जैसी हरकत एक शिक्षक के लिए उचित नहीं है और इसीलिए हमने यह कदम उठाया।"
प्रोफेसर सिरस ने एएमयू प्रशासन के इस फैसले को चुनौती देने का फैसला किया है। उन्होंने कहा, "हां, मैं इस निलंबन आदेश को अदालत में चुनौती देने जा रहा हूं क्योंकि विश्वविद्यालय या किसी भी व्यक्ति के खिलाफ मैंने कुछ भी गलत नहीं किया है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications