मुखर्जी के पास राजकोषीय घाटा कम करने का मौका
अरविंद पद्मनाभन
नई दिल्ली, 21 फरवरी (आईएएनएस)। पिछले दो वर्षो से जारी वैश्विक आर्थिक मंदी के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी वित्तीय वर्ष 2010-11 के लिए शुक्रवार को बजट पेश करते समय समग्र विकास को बढ़ावा देने और महंगाई कम करने के दो उद्देश्यों के साथ राजकोषीय घाटे को कम करने की तैयारी में दिख रहे हैं।
मौजूदा वित्तीय वर्ष में राजकोषीय घाटे के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 6.8 प्रतिशत हो जाने से मुखर्जी के पास सामाजिक कल्याण की विभिन्न योजनाओं के लिए धन का आवंटन बढ़ाने की कम ही गुंजाइश बची है।
सरकार दो मोर्चो पर महत्वपूर्ण रूप से राहत की स्थिति में है। किसानों की कर्ज माफी के लिए 60,000 करोड़ रुपये की योजना पूरी हो चुकी है और वेतन आयोग की सिफारिश पर कर्मचारियों के वेतन में हुई वृद्धि के बकाए का भुगतान हो चुका है।
आगामी बजट में व्यक्तिगत करदाताओं को किसी बड़ी छूट की शायद ही संभावना है क्योंकि वित्तीय वर्ष की पहली तीन तिमाहियों में इस मद में संग्रह में 0.41 प्रतिशत की गिरावट आई है।
यद्यपि नौ महीनों की समीक्षा अवधि में प्रत्यक्ष करों की वसूली 8.5 प्रतिशत बढ़ी है, निगम करों में भी ऐसी ही वृद्धि नहीं देखी गई।
इसलिए बड़े पैमाने पर अतिरिक्त राजस्व जुटाने की कार्रवाई से उत्पाद कर में वृद्धि हो सकती है। ऐसे किसी भी मामले में वर्ष 2008 के बाद दिए गए 186,000 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रोत्साहनों की वापसी और पूरे देश में वस्तु और सेवा कर को लागू करने की तैयारी की उम्मीद है।
सेवा कर के दायरे का विस्तार करना राजस्व बढ़ाने का एक अन्य उपाय है। चिकित्सकों, वकीलों या रेलयात्रा और माल ढुलाई जैसी सेवाओं को सेवाकर के दायरे में लाया जा सकता है। इससे राजकोषीय घाटे के 50 आधार अंक घटने की उम्मीद है।
इसके अलावा टेलीकॉम ऑपरेटरों के लिए फ्रीक्वेंसी की नीलामी और सार्वजनिक उपक्रमों में विनिवेश अतिरिक्त राजस्व जुटाने का माध्यम हो सकते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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