दुबई में सुरक्षा में सेंध पर सवाल

दुबई में सुरक्षा में सेंध पर सवाल

सलमा ज़ैदी

संपादक, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम

दुबई हवाई अड्डे का आप्रवासन विभाग अपनी कड़ी प्रक्रियाओं और मुस्तैदी के लिए जग प्रसिद्ध है.

यहाँ आने वाले हर नागरिक से लंबी बातचीत होती है. उसके आने का मकसद जाना जाता है और उसके पासपोर्ट की बारीकी से जांच और स्क्रीनिंग होती है.

ऐसे में 11 लोगों का नकली पासपोर्ट के ज़रिए देश में प्रवेश यहाँ रहने वालों को अचंभित किए हुए है.

पासपोर्ट उन लोगों के नामों पर थे जो मौजूद हैं, लेकिन निर्दोष हैं.

आपको ध्यान होगा कि हमास के कमांडर महमूद अल मबहूह की हत्या दुबई के होटल में 20 जनवरी को कर दी गई थी. इस मामले में सही पासपोर्टों का ग़लत लोगों के हाथों हुए इस्तेमाल का मामला सामने आया था.

दुबई पुलिस का आरोप है कि इसके पीछे इसराइल की ख़ुफ़िया सेवा, मोसाद का हाथ है. दुबई के पुलिस प्रमुख दाही ख़लफ़ान तमीम ने इसराइली ख़ुफ़िया सेवा मोसाद के प्रमुख के ख़िलाफ़ रेड नोटिस जारी करने की मांग की है.

इन 11 संदिग्ध लोगों के ख़िलाफ़ रेड नोटिस जारी किया जा चुका है.

हालांकि इसराइल ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि दुबई के पास इस बात के सबूत नहीं हैं.

दुबई के अख़बार खलीज़ टाइम्स ने एक पासपोर्ट विशेषज्ञ के हवाले से लिखा है कि जब कोई व्यक्ति आप्रवासन अधिकारी को जांच के लिए अपना पासपोर्ट सौंपता है तो उसकी सच्चाई की पहचान की आधी ज़िम्मेदारी स्क्रीनिंग मशीन की होती है और आधी उस व्यक्ति की जो उस काउंटर पर तैनात है.

यानी स्पेलिंग में गड़बड़ी, सीरियल नंबरों में उलटफेर आदि कुछ ऐसी बातें हैं जो पासपोर्ट को स्वैप करने पर नज़र नहीं आतीं.

पासपोर्ट सुरक्षा अधिकारी का कहना है कि मशीनें त्रुटिहीन नहीं हैं. आधी ज़िम्मेदारी एजेंट की होती है.

कई बार पासपोर्ट असली और वैध होता है जैसा कि इस मामले में चोरी किए गए पासपोर्ट थे. लेकिन उस पर मौजूद जानकारी में हेराफेरी की जा सकती है जो अधिकारी की नज़र में आ सकती थी.

दुबई पुलिस प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल ख़लफ़ान तमीम का कहना है कि इन 11 लोगों ने जो पासपोर्ट पेश किए वे सभी ज़रूरी प्रक्रियाओं से गुज़रे हैं.

संयुक्त अरब अमीरात पहला ऐसा देश है जिसने वर्ष 2002 में आँख की पुतली को पहचान संकेत के तौर पर इस्तेमाल करने की तकनीक लागू की थी. लेकिन यूरोप, अमरीका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के नागरिकों को इससे छूट दी गई है.

दुबई पुलिस के पासपोर्ट आधिकारियों ने नकली पासपोर्ट की पहचान के लिए यूरोपीय देशों में प्रशिक्षण लिया है.

लेफ्टिनेंट जेनेरल तमीम कहते हैं कि ये लोग यूरोपीय देशों से आए थे. वे वहां के हवाई अड्डों पर क्यों नहीं पकड़े गए?

दुबई पुलिस इस मामले में इसराइली ख़ुफ़िया एजेंसी, मोसाद को 99 प्रतिशत ज़िम्मेदार ठहरा रही है. इसराइल का रिकॉर्ड रहा है की वह किसी भी मामले में मोसाद की भागेदारी की न कभी पुष्टि करता है और न ही कभी खंडन.

इस विवाद की छाया ब्रिटेन, फ्रांस, आयरलैंड और जर्मनी के इसराइल के साथ संबंधों पर साफ़ मंडराती दिख रही है.

फ्रांस ने तो खुलकर इसराइल के रवैये पर आपत्ति ज़ाहिर करनी शुरू कर दी है. ब्रिटेन सहित अन्य देशों ने भी सच की तह तक पहुँचने में अपनी प्रतिबद्धता जताई है.

इस बात के साफ़ संकेत मिल रहे हैं कि 11 पासपोर्टों पर सीरियल नंबर ग़लत थे लेकिन नाम सही थे. वे कौन लोग हैं और वे कौन हैं जो इन 11 लोगों कि सरपरस्ती कर रहे थे? क्या उनकी राष्ट्रीयता एक थी- या अनेक? शायद इंटरपोल इस सवाल की तह तक पहुँच पाए.

इस राज़ से पर्दा उठेगा या नहीं यह तो वक़्त ही बताएगा लेकिन इसमें शक नहीं कि यह इस दशक की एक निहायत ही रोमांचकारी घटना है.

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