कमरे में बंद शमीम को बाहर निकाला गया : (लीड-3)

लखनऊ के बक्शी का तालाब इलाके में रहने वाले शब्बीर अहमद के 27 वर्षीय पुत्र शमीम ने बुधवार देर रात को खुद को कमरे में बंद कर लिया था और अंदर से लगातार फायरिंग कर रहा था।

बंदूक लेकर अंदर घुसा शमीम किसी की बात नहीं सुन रहा था जब भी पुलिस, साथी या घर का कोई सदस्य दरवाजे पर जाकर खोलने के बात करता तो वह फायरिंग शुरू कर देता। पुलिस के पूरे ऑपरेशन के दौरान उसने अंदर से करीब 20 राउंड गोलियां चलाईं। इस दौरान दो पुलिसकर्मी घायल भी हो गए।

पुलिस ने शमीम को काबू में करने के लिए कई तरकीबें अपनाईं। पहले पानी, आंसू गैस छोड़ी नींद की दवाईयां मिलाकार भोजन खाने को दिया लेकिन कामयाबी नहीं मिली। इस बीच पुलिस छत के ऊपर से छेद करके सीसीटीवी कैमरा लगाया ताकि यह सही से मालूम किया जा सके कि शमीम किस हालत में है और उसकी गतिविधियां क्या हैं। साथ ही उसी छेद से चिकित्सकों की सलाह से बेहोशी की दवा भी कमरे में डाली।

लखनऊ के पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) अशोक प्रसाद ने शुक्रवार को संवाददाताओं को बताया कि सारे प्रयास विफल होने के बाद हमारे पास उसे बेहोश करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था।

उन्होंने बताया कि कैमरे के जरिए हमें शमीम की गतिविधियों और हरकतों के बारे में अहम सुराग मिला। जब हमें लगा कि कि वह जिस बंदूक को लेकर घुसा है, उससे दूर एक कोने में अचेत अवस्था में टेक लगाकर बैठा हुआ है। तुरंत पुलिसकर्मी दरवाजा तोड़कर अंदर घुसे। इसके बाद एक दल ने शमीम को और दूसरे ने उसके असलहे को कब्जे में किया।

उन्होंने बताया कि जिस दोनाली बंदूक से वह फायरिंग कर रहा था, वह उसके पिता शब्बीर अहमद की लाइसेंसी बंदूक है। शमीम के स्वास्थ्य के बारे में प्रसाद ने कहा कि 35 घंटे से ज्यादा समय तक कमरे में बंद रहने के कारण उसकी हालत बेहद खराब हो गई थी, इसलिए उपचार के लिए उसे एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया।

लखनऊ के पुलिस प्रमुख राजीव कृष्णा ने शुक्रवार को यहां संवाददाताओं को बताया कि शमीम विक्षिप्त युवक है। उसको इस बात का फोबिया हो गया कि हर कोई उसे नुकसान पहुंचाना चाहता है। उन्होंने बताया कि एक बार पहले भी वह इस तरह का कदम उठा चुका है।

बताया जा रहा है कि शमीम लखनऊ विश्वविद्यालय का मेधावी छात्र रह चुका है। वह सिविल सेवा में अपना भविष्य संवारना चाहता था, लेकिन घरवाले उस पर अध्यापक बनने का दबाव डाल रहे थे। पिछले कुछ समय से वह अवसाद से गुजर रहा था। फिलहाल वह गाजियाबाद के संस्थान से बीएड कर रहा है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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