कोई मंत्री घोटाले में लिप्त हुआ तो इस्तीफा दे दूंगा : गोगोई

पिछले दिनों असम में उस समय राजनीतिक तूफान उठ खड़ा हुआ जब मीडिया ने 'द वीक' पत्रिका की एक खबर को प्रमुखता दी, जिसमें कहा गया था केंद्रीय कोष से एक हजार करोड़ रुपये के घोटाले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने सात मंत्रियों और एक पूर्व राज्यपाल को आरोपित किया है।

यह राशि पहाड़ी जिले उत्तरी कछार के विकास कार्यो के लिए स्वीकृत हुई थी, जबकि यह घोटाला 2004 से 2009 के बीच हुआ था।

गोगोई ने कहा, "एनआईए ने मंत्रियों से पूछताछ के लिए कभी अनुमति नहीं मांगी। इसलिए यह रिपोर्ट पूरी तरह गलत है, यदि कोई मंत्री इस घोटाले में शामिल हुआ तो मैं अपना इस्तीफा दे दूंगा।"

उन्होंने यह भी कहा कि यदि 'द वीक' आरोपों को साबित नहीं कर पाया, तो पत्रिका के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

वर्ष 2009 के शुरुआत में असम सरकार ने इस घोटाले की जांच की मांग की थी। इसके बाद केंद्र ने उत्तरी कछार जिले में नेताओं, उग्रवादियों और नौकरशाहों के बीच गठजोड़ के आरोपों की जांच एनआईए को सौंपी थी।

एनआईए ने 14 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है, यद्यपि इसमें किसी मंत्री का नाम नहीं है।

उधर, असम गण परिषद (अगप) के नेता अतुल बोरा ने कहा कि मुख्यमंत्री घोटाले में लिप्त मंत्रियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए उन्हें पद पर बने रहने का कोई हक नहीं है।

अगप ने शनिवार को राजभवन के सामने प्रदर्शन की भी चेतावनी दी है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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