स्तन कैंसर पीड़ितों की मददगार हैं दर्दनिवारक दवाएं
एक अध्ययन में पाया गया है कि एक सप्ताह में दो, तीन, चार या पांच बार दर्दनिवारक दवाएं लेने से बचाव होता है।
'डेली मेल' की वेबसाइट में बुधवार को बताया गया है कि दर्दनिवारक दवाएं लेने वाली महिलाओं की मृत्यु की आशंका 71 प्रतिशत तक कम हो जाती है जबकि उनमें कैंसर फैलने की आशंका 60 प्रतिशत तक कम होती है।
सप्ताह के छह या सात दिन एस्प्रिन लेने से मौत का खतरा 64 प्रतिशत तक कम हो जाता है लेकिन कैंसर फैलने की संभावना केवल 43 प्रतिशत तक कम होती है।
अमेरिका में हुए इस अध्ययन में ऐसे परिणाम ज्ञात हुए हैं जो दर्दनिवारक दवाओं की ताकत के प्रमाण पेश करते हैं।
पूर्व के शोधों से पता चला था कि एस्प्रिन आंतों के कैंसर से बचाती है। यद्यपि स्तन और प्रोस्टेट सहित अन्य प्रकार के कैंसर में इस दवा का महत्व ज्ञात नहीं हो सका था।
हाल के परिणाम पिछले 30 वर्षो से चल रही एक परियोजना में सामने आए हैं। इस परियोजना के तहत 238,000 नर्सो के स्वास्थ्य का अध्ययन किया गया था।
हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की प्रमुख शोधकर्ता मिशेल होम्स कहती हैं, "यह ऐसा पहला अध्ययन है जिसमें पता चला है कि जिन महिलाओं में स्तन कैंसर का इलाज उसकी शुरुआती अवस्था में शुरू हो जाता है उनमें एस्प्रिन कैंसर फैलने और पीड़ित महिला की मौत के प्रति खतरे को काफी कम कर देती है।"
एस्प्रिन के साथ आईबुप्रोफेन और नैप्रोक्सेन भी खतरे को कम करती हैं लेकिन पैरासीटामोल के साथ ऐसा नहीं है।
विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि एस्प्रिन के गंभीर दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। इनमें पेट में जलन होना शामिल है। इससे अल्सर और रक्त का घातक बहाव हो सकता है।
कुछ लोगों में इन दवाओं से फायदे की अपेक्षा नुकसान अधिक होता है।
होम्स कहती हैं, "एस्प्रिन को कैंसर के पारंपरिक उपचार का विकल्प नहीं माना जा सकता और कुछ लोगों में एस्प्रिन लेने के दुष्प्रभाव होते हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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