शिमला में हेपेटाइटिस ई के 160 से ज्यादा मामले

शिमला, 18 फरवरी (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में जनवरी के मध्य से लेकर अब तक हेपेटाइटिस ई के 160 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। हेपेटाइटिस ई दूषित पानी पीने से होने वाली जिगर की बीमारी है।

'समेकित रोग निगरानी कार्यक्रम' के निगरानी अधिकारी ने गुरुवार को आईएएनएस को बताया, "शिमला के विभिन्न सरकारी व निजी अस्पतालों में पीलिया (हेपेटाइटिस ई) से पीड़ित मरीजों के संबंध में पता चला है। बुधवार को 12 मरीजों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती किया गया था। अब तक 161 मरीजों की जानकारी मिली है।"

दिल्ली स्थित 'नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल' (एनसीडीसी) पहले ही शिमला के खालिनी, पंथघाटी, विकास नगर और कसुमपति इलाकों में हेपेटाइटिस ई की पुष्टि कर चुका है।

उन्होंने बताया कि दूषित पानी पीने के 90 दिन बाद तक जल जनित रोग हो सकते हैं और जनवरी मे यहां दूषित पानी मिल रहा था। इसलिए दूषित जल पीने वाले लोगों में मार्च के आखिर तक इस बीमारी की शिकायत हो सकती है।

उन्होंने कहा, "अब वहां दूषित जल की कोई समस्या नहीं है। स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम लगातार पानी के नमूनों की जांच कर रहे हैं।"

शिमला नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि इस बीमारी के फैलने के तुरंत बाद ही जल के दूषित स्रोत का पता चल गया था और अब उसमें सुधार कर दिया गया है।

नगर निगम की स्वास्थ्य अधिकारी सोनम नेगी ने बताया, "हम पीलिया से प्रभावित इलाकों में लगातार पानी के नमूनों की जांच कर रहे हैं। हम लोगों को बीमारी से बचने के लिए निवारक उपाय जैसे उबला हुआ पानी पीने के संबंध में भी बता रहे हैं।"

यद्यपि स्थानीय लोगों का दावा है कि सरकार अब तक बीमारी की गंभीरता को नहीं समझ रही है।

वर्ष 2007 में भी इन इलाकों में इस बीमारी का पता चला था। उस समय पीलिया के 1,000 मामले सामने आए थे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+