वेदांत के शेयर बेच रहे हैं निवेशक
अंतर्राष्ट्रीय गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) एक्शनएड के अनुसार, जोसेफ राउनट्री ट्रस्ट ने वेदांता से हाथ खींचने का फैसला किया है। वर्ष 2007 के बाद इसी मुद्दे पर ऐसा कदम उठाने वाली यह चौथी बड़ी कंपनी है। इससे पहले इस महीने की शुरुआत में चर्च ऑफ इंग्लैंड ने भी ऐसा ही कदम उठाया था।
वर्ष 2007 के बाद चार संस्थागत निवेशकों ने कंपनी से नाता तोड़ लिया है। सबसे पहले यह कदम नार्वे पेंशन फंड ने उठाया था।
इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री को अर्जी देने दिल्ली आईं एक जनजातीय महिला कुमती माझी ने कहा, "हमें खुशी है कि इस लड़ाई में विश्व के विभिन्न हिस्सों से हमें समर्थन मिल रहा है। हम चर्च ऑफ इंग्लैंड और जोसेफ रोनट्री ट्रस्ट को उनके निर्णय के लिए धन्यवाद देते हैं।
एक्शनएड इंडिया की ओर से जनजातियों के अधिकारों के लिए काम करने वाली ब्रातींदी जेना कहती हैं कि वेदांत नयामगिरी पहाड़ियों में कोंढ जनजाति के पवित्र पर्वत को नष्ट करने की तैयारी में है, इससे इस जनजाति के अस्तित्व को खतरा पैदा हो सकता है।
पिछले साल ब्रिटिश सरकार ने वेदांत को डोंगरिया कोंढ के मानवाधिकारों की रक्षा में विफल रहने के लिए फटकार लगाई थी।
वर्ष 2007 में नार्वे सरकार ने कंपनी में अपनी 1.3 करोड़ डॉलर की हिस्सेदारी बेच दी थी, जबकि पिछले साल मार्टिन करी इंवेस्टमेंट ने अपने 14 लाख पाउंड के शेयर बेच दिए थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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