भारत-पाक वार्ता पर आतंक के काले बादल

विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने रविवार को कहा कि आतंकी संगठन नहीं चाहते हैं कि दोनों देशों के बीच मधुर संबंध स्थापित हों, लिहाजा वार्ता में बाधा उत्पन्न करने के उद्देश्य से पुणे धमाके को अंजाम दिया। यह बात कहते हुए कृष्णा खुद असमंजस में पड़ गए और भारत-पाक वार्ता पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया।
जांच के बाद बताएंगे
मीडिया से बातचीत में कृष्ण ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार वार्ता पर असर नहीं पड़ना चाहिए, लेकिन आगे की स्थिति पर कुछ नहीं कहना चाहते हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।
केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने उम्मीद जताई है कि पुणे धमाके से भारत-पाक वार्ता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मीडिया ने जब उनसे सही स्थिति पूछी तो उन्होंने कहा है कि वे विदेश मंत्रालय के मामलों पर चर्चा करने नहीं आए हैं। पड़ोसी देश के साथ सचिव स्तर की वार्ता होगी या नहीं यह फैसला नई दिल्ली में होगा।
क्या होगा भारत का रुख
हाल ही में भारत ने पाकिस्तान के समक्ष वार्ता का प्रस्ताव रखा, जिस पर पड़ोसी देश ने हामी भर दी। यही नहीं पाकिस्तान वार्ता में कश्मीर समेत कई मुद्दे लाने की तैयारी में है, लेकिन पुणे धमाके ने इस प्रस्तावित वार्ता में खटाई घोल दी है। अब देखना यह है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद भारत का क्या रुख रहता है।
गौरतलब है कि शनिवार को पुणे की जर्मन बेकरी में जबरदस्त धमाका हुआ, जिसमें 9 लोग मारे गए और 50 से अधिक घायल हुए। बताया जा रहा है कि पुणे धमाके की योजना इस्लामाबाद में जमात-उद-दावा नाम के आतंकी संगठन ने बनाई थी, जिसमें मुंबई हमले का प्रमुख साजिशकर्ता हाफिज सईद भी मौजूद था। यही नहीं आतंकियों की इस साजिश में पुणे के बाद दिल्ली, इंदौर और कानपुर को निशाना बनाने की योजना है।












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