अमेरिकी मीडिया में भारत-पाक वार्ता के भविष्य पर सवाल
वाशिंगटन, 15 फरवरी (आईएएनएस)। अमेरिकी मीडिया ने पुणे में हुए बम विस्फोट के संदिग्ध आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली से संबंध तथा भारत-पाकिस्तान की प्रस्तावित वार्ता पर इसके संभावित प्रभाव पर ध्यान केंद्रित करते हुए इस घटना को व्यापक तवज्जो दी है।
समाचार पत्र 'न्यूयार्क टाइम्स' का कहना है कि भारतीय अधिकारी यह निर्धारित करने का प्रयास कर रहे हैं कि पुणे हमले का संबंध किसी ज्ञात आतंकवादी संगठन और मुंबई पर 2008 के आतंकवादी हमलों के आरोपियों से तो नहीं है।
अखबार ने कहा कि यह हमला ऐसे नाजुक राजनीतिक मोड़ पर हुआ जब मुंबई पर आतंकवादी हमले के बाद स्थगित वार्ता को फिर आरंभ करने के लिए भारत-पाकिस्तान सहमत हो गए थे।
'क्रिश्चियन साइंस मॉनीटर' ने भी समान रुख प्रकट करते हुए कहा है कि पुणे की जर्मन बेकरी में हुआ बम हमला पाकिस्तान के साथ वार्ता शुरू करने के भारतीय नेताओं के संकल्प की परीक्षा है।
क्रिश्चियन साइंस मानीटर के अनुसार 26/11 के हमले के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच स्थगित वार्ता को फिर शुरू करने पर सहमति के केवल दो दिन बाद यह बम हमला हुआ। दशकों से भारत-पाकिस्तान संबंध आतंकवादी खतरे के बंधक बन गए हैं।
समाचार पत्र 'वाशिंगटन पोस्ट' ने भी कहा कि भारत इस बात की जांच कर रहा है कि शांति वार्ता से पहले पुणे विस्फोट के पीछे कहीं पाकिस्तानी तत्वों का तो हाथ नहीं है।
पत्र के अनुसार जर्मन बेकरी ओशो आश्रम के समीप है, जिससे काफी अधिक विदेशी नागरिक जुड़े हैं। इस स्थान का हेडली ने भी दौरा किया था।
समाचार चैनल 'सीएनएन' ने कहा कि इस महीने के अंत में भारतीय और पाकिस्तानी अधिकारियों के बीच नई दिल्ली में वार्ता के लिए सहमत होने के बाद शनिवार को पुणे में बम हमला हुआ।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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