प्रधानमंत्री ने कहा कि खाद्य महंगाई का खराब दौर खत्म, जनता असहमत (लीड-3)

उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में खाद्य पदार्थो की कीमतों में गिरावट आई है और यह जारी रहने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री के कथन को नागरिक स्वीकार करने में हिचक रहे हैं। देश की खाद्य महंगाई की दर इस समय 17 प्रतिशत है।

बढ़ती कीमतों खासकर आवश्यक वस्तुओं की महंगाई रोकने के मुद्दे पर चर्चा के लिए आयोजित मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में सिंह ने कहा, "रोजगार संरक्षित रखने में हमने अच्छा काम किया लेकिन खाद्य पदार्थो की महंगाई रोकने में हमें ज्यादा सफलता नहीं मिली।"

रियायती दर की दुकानों के माध्यम से वितरण के लिए अतिरिक्त अनाज जारी करने जैसे संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के कदमों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "अंत में मैं कहना चाहूंगा कि जहां तक खाद्य वस्तुओं की महंगाई का सवाल है, सबसे बुरा दौर बीत चुका है।"

सिंह ने कहा कि खाद्य पदार्थो की कीमतों हाल के दिनों में नरमी आई है और इसके जारी रहने की उम्मीद है।

राजधानी के लोग प्रधानमंत्री की इस बात को स्वीकार करने के इच्छुक नहीं हैं और उनका कहना है कि दूध, चीनी और दालों जैसी आवश्यक वस्तुओं के दाम एक वर्ष पहले की तुलना में करीब दोगुना हैं।

एक गृहणी लीला गणेशन ने कहा, "जब दाल 80 रुपये किलोग्राम हो और एक केला चार रुपये में मिले तो हम इस बारे में क्या कह सकते हैं? मेरे राशन का बजट दोगुना हो चुका है और इसके कम होने का कोई संकेत नहीं है।"

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री डी.के.जोशी ने कहा, "सरकार क्या कह रही है इस बारे में मैं निश्चित नहीं हूं। मैं कह सकता हूं कि हाल के महीनों में जितनी तेजी से कीमतें बढ़ी हैं उतनी तेजी से कम नहीं होंगी।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि महंगाई रोकने में राज्य सरकारों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है और उन्हें केंद्र से जारी खाद्य वस्तुओं की जरूरतमंद लोगों तक शीघ्र पहुंच सुनिश्चित करनी चाहिए।

सिंह ने कहा, "मेरे विचार से कुछ राज्यों को छोड़कर हमारी वितरण प्रणाली पुरानी हो गई है और इसमें आमूल बदलाव की आवश्यकता है। राज्य सरकारों को विकसित हो रहे बाजार हस्तक्षेप तंत्र पर ध्यान केंद्रित देना चाहिए, यह सार्वजनिक वितरण प्रणाली के पूरक के रूप में काम कर सकता है। राज्यों के नागरिक आपूर्ति निगमों और निदेशालयों को बहुत मजबूत करने की आवश्यकता है।"

सिंह ने दीर्घकालिक संदर्भ में कम उत्पादकता के कारणों पर ध्यान देने को कहा। उन्होंने कहा कि दालों सहित कई फसलों जिनकी आपूर्ति कम है, की प्रति हेक्टेयर उपज बढ़ाने की बड़ी संभावना है।

सिंह ने बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए आवश्यक वस्तुओं के निर्यात पर अस्थाई रोक लगाने तथा राज्य सरकारों से वे सभी कदम उठाने का आग्रह किया जिनसे गरीबों पर बोझ न बढ़े।

प्रधानमंत्री ने जमाखोरी रोकने के लिए राज्य सरकारों से आवश्यक वस्तु रखरखाव कानून लागू करने और वस्तुओं की कृत्रिम कमी पैदा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आग्रह किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्रियों को आयातित कच्ची चीनी के प्रसंस्करण की सभी बाधाओं को भी दूर करना चाहिए क्योंकि उत्तर प्रदेश जैसे कई राज्यों ने चीनी मिलों में कच्ची चीनी का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया है।

देश में खाद्य महंगाई के 17.56 प्रतिशत पर पहुंचने की पृष्ठभूमि में यह एक दिवसीय सम्मेलन आयोजित हो रहा है। पिछले वर्ष की तुलना में आलू की कीमतें 50 प्रतिशत, चावल की 11 प्रतिशत, गेंहू की 16 प्रतिशत और दूध की 14 प्रतिशत बढ़ गई हैं।

गैर कांग्रेसी राज्यों के कई मुख्यमंत्रियों ने बढ़ती महंगाई के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी.एस.येदियुरप्पा ने कहा कि केंद्र सरकार की नाकामी का दोष राज्यों पर थोपना दुर्भाग्यपूर्ण है।

केरल के मुख्यमंत्री वी.एस.अच्युतानंदन ने कहा कि चावल, गेंहू और चीनी जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में केंद्र सरकार के सुधार नहीं करने के कारण महंगाई बढ़ रही है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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