राजस्थान के 27 जिलों में बाल श्रमिक परियोजनाएं लागू : मेघवाल
मेघवाल गुरुवार को नई दिल्ली के भारतीय कृषि अनुसंधान कौंसिल, पूसा में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की 90वीं वर्षगांठ पर आयोजित राज्यों के श्रम मंत्रियों के 42वें सम्मेलन में भाग ले रहे थे। समारोह की अध्यक्षता केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मल्लिकार्जुन खरगे ने की। इस अवसर पर केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री हरीश रावत भी मौजूद थे।
उन्होंने बताया कि भारत सरकार के शत प्रतिशत अनुदान से राज्य से विभिन्न जिलों में श्रम विभाग के माध्यम से राष्ट्रीय बाल श्रमिक परियोजनाएं चलायी जा रही हैं। राजस्थान के 29 जिलों में से 27 जिलों में वर्तमान में ये परियोजनाएं चल रही हैं। इनके तहत 1155 विशेष विद्यालय स्वीकृत किये गये जिनमें से 405 विशेष विद्यालय वर्तमान में चल रहे हैं। इनमें 20 हजार 250 बालक अनौपचारिक शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं तथा अभी तक 29 हजार से अधिक बालकों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ा जा चुका है।
मेघवाल ने बताया कि 'महानरेगा' योजना से ग्रामीण श्रमिकों को बहुत ही राहत मिली है और रोजगार की बहुत बड़ी समस्या का समाधान हो रहा है। प्रदेश में इस योजना के अंतर्गत बड़े पैमाने पर लोगों को रोजगार मिल रहा है।
श्रम मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा असंगठित क्षेत्र में 20 व्यवसायों में कार्यरत कामगारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान किये जाने के उद्देश्य से लागू की गई "राजस्थान विश्वकर्मा गैर संगठित कामगार अंशदायी पेन्शन योजना" का विस्तार आलोच्य अवधि में 29 जिलों में किया जाकर लगभग बारह हजार कामगारों को योजना से जोड़ा गया है।
श्रम मंत्री ने कहा कि देश में ठेका श्रम एक ज्वलन्त समस्या है। नेशनल सैम्पल सर्वे की 2004-05 की रिपोर्ट के अनुसार देश की कुल श्रम शक्ति में लगभग 28.9 प्रतिशत आकस्मिक श्रमिक हैं। जिनमें से अधिकांशत: ठेका श्रमिकों के रूप में कार्य करते हैं। ठेका श्रमिक लगभग सभी प्रकार के नियोजनों में पाये जाते हैं। विशेषतौर पर कृषि, उत्पादन एवं सेवाओं में इनका नियोजन अधिक संख्या में किया जा रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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